नई दिल्ली, 11 सितंबर । केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) की सीईओ भावना सक्सेना ने कहा कि बच्चों को अवैध दत्तक ग्रहण से बचाने के लिए पूरे बाल संरक्षण तंत्र में जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य और कानून का संरक्षण मिलना चाहिए।
भावना सक्सेना ने अवैध तरीके से बच्चों को गोद लेने पर रोक लगाने और बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा को मजबूत करने को लेकर गुरुवार शाम को दिल्ली सचिवालय में आयोजित दत्तक ग्रहण जागरूकता कार्यशाला में यह बात कही। उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में किसी भी तरह का शॉर्टकट नहीं हो सकता और इच्छुक दत्तक माता-पिता को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का ही पालन करना चाहिए।
कार्यशाला में बाल संरक्षण और दत्तक ग्रहण व्यवस्था से जुड़े करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अधिकारी, बाल कल्याण समितियां, जिला बाल संरक्षण इकाइयां, दत्तक ग्रहण एजेंसियां, अस्पताल एवं नर्सिंग होम से जुड़े प्रतिनिधि, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहित विभिन्न हितधारक शामिल रहे।
कार्यक्रम में कारा की सीईओ भावना सक्सेना, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह, दिल्ली पुलिस की डीसीपी नेहा यादव, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका भारद्वाज, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ओपी व्यास और आउटर नॉर्थ जिले के सीएमओ डॉ. अनिल यादव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दिल्ली सरकार की सचिव रश्मि सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य और पुलिस विभाग से लेकर एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, जिला बाल संरक्षण इकाइयों और बाल कल्याण समितियों तक सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी व्यापक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सामूहिक प्रयास बच्चों के सुरक्षित और संरक्षित बचपन के लिए संस्थागत प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।
कार्यशाला में अवैध दत्तक ग्रहण की रोकथाम और उससे निपटने के उपायों पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में अवैध दत्तक ग्रहण के उभरते रुझान, चुनौतियां और राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई पर चर्चा हुई। दूसरे सत्र में अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य व्यवस्था, पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका पर विचार किया गया। तीसरे सत्र में कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया।
जागरूकता अभियान के तहत कार्यशाला में कानूनी दत्तक ग्रहण पर आधारित एक फिल्म भी जारी की गई। फिल्म के माध्यम से अधिकृत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया का पालन करने के महत्व और अवैध दत्तक ग्रहण से जुड़े जोखिमों को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा अवैध दत्तक ग्रहण के खिलाफ जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों और वास्तविक अनुभवों को भी साझा किया गया। कार्यशाला के अंत में इंटरैक्टिव क्विज का आयोजन हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने कानूनी प्रावधानों और अपनी जिम्मेदारियों से जुड़ी जानकारी को परखा।
