गंगटोक, 12 सितंबर । सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शुक्रवार को हिमनदीय जोखिम संबंधी आयोग के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश गुप्ता के नेतृत्व में आयोग के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान आयोग ने हिमनदीय जोखिमों के न्यूनीकरण से संबंधित अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री पिंचो नामग्याल लेप्चा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री तमांग ने शनिवार को सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि सिक्किम सरकार ने 11 सितंबर, 2024 को आयोग का गठन किया था। इसका उद्देश्य वर्ष 2023 में दक्षिण ल्होनाक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के बाद राज्य में हिमनदीय जोखिमों को कम करने के लिए व्यापक रणनीति और कार्ययोजना तैयार करना था।
आयोग ने हिमनदीय जोखिम से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारी, आपदा के प्रति लचीलापन और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से आठ प्रमुख सिफारिशें दी हैं। इनके क्रियान्वयन के जरिए सिक्किम को हिमालयी राज्यों के लिए एक आदर्श तथा देश में हिमनदीय जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में अनुकरणीय राज्य बनाने का लक्ष्य है।
तमांग ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को उनके विशेषज्ञ योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आयोग की सिफारिशों को दृढ़ संकल्प और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के साथ लागू करेगी। सरकार सुरक्षित, अधिक लचीले और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक सिक्किम के निर्माण के साथ हिमालयी क्षेत्र में हिमनदीय जोखिम न्यूनीकरण के लिए राज्य को उदाहरण के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि 4 अक्टूबर, 2023 को दक्षिण ल्होनाक ग्लेशियल झील फटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने तीस्ता नदी प्रणाली में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ में उत्तर सिक्किम के चुंगथांग स्थित 1,200 मेगावाट की तीस्ता चरण-3 जलविद्युत परियोजना का बांध पूरी तरह नष्ट हो गया था। इसके अलावा कई पुलों, सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
इस घटना के बाद राज्य सरकार ने भविष्य में ऐसी आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, पूर्व चेतावनी प्रणाली और दीर्घकालिक रणनीति पर विशेष जोर दिया। नेपाल में 26 अगस्त, 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भी हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिम को रेखांकित किया है।
नेपाल की हालिया आपदा के बाद सिक्किम में उच्च जोखिम वाली ग्लेशियल झीलों की निगरानी और जोखिम न्यूनीकरण उपायों को और प्राथमिकता दी गई है। राज्य में वर्तमान में 40 उच्च जोखिम वाली ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर कम करने और संरचनात्मक सुरक्षा उपायों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
