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जांजगीर-चांपा/बम्हनीडीह, 14 सितम्बर । छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के तहत जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में आयोजित विशाल धार्मिक समागम में साेमवार काे सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपाय बताए। आध्यात्मिक कथा के मंच से उन्होंने लोगों को डिजिटल दुनिया में सतर्क और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बम्हनीडीह सहित आसपास के दर्जनों गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आचार्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कहा कि आज मोबाइल फोन और इंटरनेट लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। डिजिटल माध्यमों ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, लेकिन थोड़ी सी असावधानी आर्थिक नुकसान का कारण भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता, विवेक और संयम सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्वयं सतर्क रहें और अपने परिवार के बुजुर्गों, बच्चों तथा अन्य लोगों को भी साइबर ठगी के तरीकों के बारे में जानकारी दें।
उन्होंने विशेष रूप से बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बैंक ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड नंबर, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी फोन पर किसी को भी न बताएं। साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, बिजली विभाग के कर्मचारी, कूरियर कंपनी के प्रतिनिधि या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराने या भरोसे में लेने का प्रयास करते हैं। ऐसी किसी भी कॉल पर बिना सत्यापन के विश्वास नहीं करना चाहिए।
आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर आने वाले संदिग्ध लिंक से भी सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लॉटरी जीतने, मुफ्त उपहार, फर्जी लोन, नौकरी या पार्ट-टाइम काम का लालच देकर भेजे जाने वाले लिंक साइबर ठगी का माध्यम हो सकते हैं। ऐसे अज्ञात लिंक पर क्लिक करने या अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।
उन्होंने अनजान नंबरों से आने वाली संदिग्ध वीडियो कॉल को लेकर भी लोगों को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी वीडियो कॉल, ब्लैकमेलिंग और डर का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में घबराकर या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए, बल्कि तत्काल परिवार के सदस्यों और पुलिस को जानकारी देनी चाहिए।
सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी दी। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय करने तथा प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत रखने की सलाह दी गई। उन्होंने लोगों से कहा कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी, दस्तावेज और ऐसी तस्वीरें साझा करने से बचें, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया। लोगों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। पीड़ित व्यक्ति नजदीकी पुलिस थाने में भी शिकायत दर्ज करा सकता है। ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से रकम को फ्रीज कराने और आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
धार्मिक समागम में साइबर सुरक्षा को लेकर दिए गए इस संदेश का श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। कथा पंडाल में मौजूद विशाल जनसमूह ने करतल ध्वनि के साथ साइबर जागरूकता के संदेश का समर्थन किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक और सामाजिक जागरूकता के साथ डिजिटल सुरक्षा की जानकारी भी आज के समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
छत्तीसगढ़ में चल रहे साइबर जागृति अभियान का उद्देश्य लोगों को ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, यूपीआई धोखाधड़ी और सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना है। बम्हनीडीह में आयोजित कार्यक्रम में आध्यात्मिक मंच के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा।
