शिमला, 06 अक्टूबर । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चिकित्सकों से चिकित्सा पेशे को केवल आजीविका का साधन न मानकर करुणा, संवेदनशीलता और निःस्वार्थ सेवा का माध्यम बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे मरीजों को आत्मीयता का अनुभव हो और संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़े। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को ईश्वर की संज्ञा दी जाती है और मानवता की सेवा उनका मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने एम्स बिलासपुर के प्रथम बैच के 89 प्रशिक्षु डॉक्टरों को उपाधियां प्रदान कीं और पांच मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। उन्होंने प्रथम बैच के सभी उत्तीर्ण छात्रों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस संस्थान के पहले बैच का हिस्सा होना उनके लिए गर्व और ऐतिहासिक क्षण है।
राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टरों का मूल कर्तव्य बीमारी की सटीक पहचान और उसका इलाज करना है, लेकिन इसके साथ मरीज के प्रति संवेदनशीलता और करुणा का भाव भी जरूरी है। डॉक्टर का सहानुभूतिपूर्ण और आत्मीय व्यवहार मरीज के इलाज में मददगार साबित होता है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से कहा कि वे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के प्रति प्रेम और अपनत्व का भाव रखें।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। चिकित्सकों के प्रयास और मनोबल से इस चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से प्रशिक्षित डॉक्टर दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देने से पीछे नहीं हटेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि कई बार डॉक्टर दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने से कतराते हैं, लेकिन एम्स जैसे संस्थान से निकलने वाले चिकित्सकों से देश को अलग उम्मीद है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना चिकित्सकों के जीवन का मुख्य ध्येय होना चाहिए। सच्ची आत्मसंतुष्टि निःस्वार्थ सेवा से मिलती है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दवाओं और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की कीमतें आम लोगों के लिए चिंता का विषय हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज में कई बार गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपनी जमीन और घर तक बेचने पड़ते हैं। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना से गंभीर बीमारियों के इलाज में लोगों को आर्थिक मदद मिली है, लेकिन दुर्गम क्षेत्रों में अभी भी कई लोग इसके लाभ से वंचित हैं।
राष्ट्रपति ने समारोह में मौजूद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के बारे में लोगों को व्यापक जानकारी दी जाए, जिससे जरूरतमंद लोग इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने एम्स बिलासपुर के प्रबंधन और युवा चिकित्सकों से कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नए शोध और उपाय तलाशने का आह्वान भी किया।
राष्ट्रपति मुर्मू मंगलवार से हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। वह सुबह एम्स बिलासपुर के हेलीपैड पहुंचीं, जहां राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री सुक्खू और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सहित अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति एम्स के सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में पहुंचीं।
दीक्षांत समारोह के दौरान प्रशिक्षु डॉक्टरों ने कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर उपाधियां प्राप्त कीं। एम्स प्रशासन की ओर से महिला और पुरुष दोनों प्रशिक्षु डॉक्टरों के लिए यही पहनावा निर्धारित किया गया था। समारोह से पहले सामूहिक चित्र भी लिया गया।
समारोह को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री सुक्खू और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री नड्डा ने भी संबोधित किया। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत मां श्री नयना देवी को नमन करते हुए की। उन्होंने बिलासपुर की ऐतिहासिक और पावन भूमि को भी नमन किया। उन्होंने देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले बिलासपुर के वीरों और अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।
दीक्षांत समारोह के बाद राष्ट्रपति मुर्मु मनाली के लिए रवाना हुईं, जहां उनका रात्रि ठहराव प्रस्तावित है। बुधवार को राष्ट्रपति हिडिंबा माता मंदिर में दर्शन करेंगी और इसके बाद अटल टनल रोहतांग का दौरा प्रस्तावित है। राष्ट्रपति 8 अक्टूबर की सुबह हिमाचल प्रदेश से दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
