नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर कहा कि उनको अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी प्रस्तुत करना चाहिए। गोयल ने इसको लेकर राहुल गांधी से 10 सवाल भी पूछे।
वहीं, ललन सिंह ने राहुल और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में संविधान सर्वोच्च है, कोई परिवार नहीं। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।
भाजपा मुख्यालय में मंगलवार को पत्रकार वार्ता में जदयू के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की मौजूदगी में पीयूष गोयल ने राहुल गांधी की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनके व्यवहार और बयानों में दोहरे मापदंड दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने राजनीतिक आचरण और पिछले रिकॉर्ड पर चर्चा नहीं करती।
गोयल ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती थी और चयन प्रक्रिया में किसी अन्य पक्ष से परामर्श या चर्चा नहीं होती थी। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने वर्ष 2023 में नया कानून लाकर चयन प्रक्रिया में बदलाव किया और इसमें नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया।
गोयल के अनुसार, अब प्रधानमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष चयन समिति में शामिल होकर चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े निर्णय लेते हैं। मौजूदा व्यवस्था में विपक्ष को भी चयन प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है।
पीयूष गोयल ने कहा कि मोदी सरकार ने निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने चुनाव आयुक्तों को कानूनी प्रावधानों के विपरीत राजनीतिक पद देने का प्रयास नहीं किया।
उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी के सामने 10 सवाल रखना चाहते हैं और उन्हें इनका जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल चुनाव में वोट चोरी के आरोप लगाते हैं, निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हैं, लेकिन अपने दावों के समर्थन में शपथपत्र दाखिल नहीं करते।
गोयल ने मांग की कि राहुल अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण और साक्ष्य प्रस्तुत करें तथा उन्हें शपथ के तहत दर्ज कराएं। सार्वजनिक जीवन में गंभीर आरोप लगाने वालों को उनकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठाते हुए गोयल ने सवाल किया कि यदि यह प्रक्रिया इतनी गंभीर समस्या थी, तो बिहार में इसके संचालन के दौरान राहुल गांधी ने आवाज क्यों नहीं उठाई। उन्होंने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल किए। गोयल ने पूछा कि इन राज्यों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने के मामले में कांग्रेस ने क्या कदम उठाए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने की चुनौती दी।
वहीं,
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि पिछले कई दिनों से राजनीतिक प्रदर्शन और बयानबाजी के माध्यम से देश में अराजकता का माहौल बनाने तथा संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
ललन सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने परिवार को प्राथमिकता देती है और राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बाहर किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर भी कांग्रेस से सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा इस तरह अदालत के बाहर प्रदर्शन करने की परंपरा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने पूछा कि जब कोई पक्ष सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करता है, तो फिर उसी मामले को लेकर अदालत के बाहर प्रदर्शन करने का क्या औचित्य है।
ललन सिंह ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और उसके राजनीतिक तौर-तरीकों की आलोचना करते हुए कहा कि देश की जनता संवैधानिक संस्थाओं को लेकर इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगी।
