नई दिल्ली, 17 अक्टूबर । गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के द्वारका कैंपस में 21वें खेल महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। तीन दिवसीय इस खेल उत्सव में विश्वविद्यालय और इसके संबद्ध संस्थानों की 80 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया, जबकि 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में भागीदारी की।
खेल महोत्सव का उद्घाटन मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेरठ के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षण-प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने का स्थान है। खेल जीवन की सच्ची शिक्षा देते हैं और हार के बाद भी जीत का हौसला बनाए रखने तथा निरंतर आत्मसुधार की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने खेल शिक्षा में नवीनतम शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद भारतीय महिला कबड्डी टीम की पूर्व कोच डॉ. सुनील डबास ने कहा कि खेल हमें दर्द सहना सिखाते हैं। जो व्यक्ति दर्द सहना सीख जाता है, वह जीवन में कभी हार नहीं मानता। उन्होंने कहा कि खेलों में रोमांच के साथ जवाबदेही भी जरूरी है। खिलाड़ियों को अपना लक्ष्य नहीं बदलना चाहिए, बशर्ते वे उसे हासिल करने के लिए शत-प्रतिशत प्रयास करें।
आईपीयू के कुलपति डॉ. महेश वर्मा ने कहा कि खेल जीवन की कठिन परिस्थितियों से निपटना सिखाते हैं। हार और जीत जीवन के दो पहलू हैं, जिन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ स्वीकार करना चाहिए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की गृह पत्रिका ‘यू-फोकस’ के नवीनतम अंक का लोकार्पण भी किया गया।
खेल महोत्सव के प्रमुख आकर्षण मार्च पास्ट में आर्मी स्कूल ऑफ एजुकेशन ने प्रथम, सेंट स्टीफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग ने द्वितीय और आईटी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण निदेशालय की निदेशक प्रो. मीनू कपूर ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन में यूनिवर्सिटी और इसके संबद्ध संस्थानों की 80 से अधिक टीमों तथा 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही।
