नागोया, 19 अक्टूबर । एशियाई पैरा खेल-2026 में भारतीय पैरा एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किए। हरियाणा के रिंकू हुड्डा ने 65.11 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता, जबकि उत्तर प्रदेश के अजीत सिंह यादव ने 65.02 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक हासिल किया। दोनों भारतीय खिलाड़ियों के बीच महज नौ सेंटीमीटर का अंतर रहा। इंडोनेशिया के सक्त्योनो आर ने 55.30 मीटर के प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता।
रिंकू और अजीत ने स्पर्धा में पहले दो स्थान हासिल कर भारत को दोहरी सफलता दिलाई। एफ46 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनके एक या दोनों ऊपरी अंगों में अंग की कमी, मांसपेशियों की शक्ति में कमी या अंगों की गति-सीमा से जुड़ी अक्षमता होती है।
रिंकू हुड्डा : संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय सफलता तक का सफर
हरियाणा के रोहतक के रहने वाले रिंकू हुड्डा भारतीय पैरा एथलेटिक्स के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनका जन्म एक जनवरी, 1999 को हुआ था। तीन साल की उम्र में धान की बुवाई करने वाली मशीन में बायां हाथ फंसने के कारण उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा था। हालांकि, इस मुश्किल के बावजूद उन्होंने खेलों के प्रति अपना जुनून बनाए रखा और आगे चलकर भाला फेंक में अपनी पहचान बनाई।
रिंकू को भारतीय पैरा एथलीट अमित कुमार सरोहा ने भाला फेंक में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 2015 में युवा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता और 2016 में स्विट्जरलैंड में आयोजित विश्व अंडर-20 पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। रियो पैरालंपिक 2016 में वह पांचवें स्थान पर रहे थे। उस समय वह महज 18 वर्ष के थे और पैरालंपिक में हिस्सा लेने वाले भारत के सबसे कम उम्र के पैरा एथलीटों में शामिल थे।
रिंकू ने विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में रजत और 2024 में कांस्य पदक जीता। वर्ष 2025 की विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। पेरिस पैरालंपिक 2024 में वह चौथे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने 2026 में दुबई ग्रां प्री, नई दिल्ली ग्रां प्री और इंडियन ओपन में भी स्वर्ण पदक जीते।
रिंकू भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के रोहतक केंद्र में प्रशिक्षण लेते हैं और टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) में शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्हें टॉप्स के तहत 32.59 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता मिली है, जबकि प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के लिए वार्षिक कैलेंडर (एसीटीसी) के तहत 17.42 लाख रुपये से अधिक की सहायता दर्ज है।
अजीत सिंह यादव : हादसे के बाद पैरालंपिक पदक तक पहुंचे
उत्तर प्रदेश के इटावा से जुड़े अजीत सिंह यादव ने रजत पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा। पांच सितंबर, 1993 को जन्मे अजीत का जीवन 2017 में एक रेल हादसे के बाद बदल गया था। ट्रेन से गिर रहे अपने मित्र को बचाने की कोशिश में उनका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। करीब चार महीने तक स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और पैरा एथलेटिक्स में अपना करियर आगे बढ़ाया।
अजीत ने 2018 में पंचकूला में आयोजित पैरा एथलेटिक्स सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके बाद 2019 में चीन के बीजिंग ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की। उसी वर्ष दुबई में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता और टोक्यो पैरालंपिक 2020 के लिए क्वालीफाई किया, जहां वह आठवें स्थान पर रहे।
अजीत ने 2023 में पेरिस में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी सफलता का सिलसिला जारी रखा। पेरिस पैरालंपिक 2024 में उन्होंने रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। एशियाई पैरा खेलों के पिछले संस्करण में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था।
अजीत शारीरिक शिक्षा में पढ़ाई कर चुके हैं और ग्वालियर स्थित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान से पीएचडी भी कर रहे हैं। वह साई बेंगलुरु और जर्मनी के ऑफेनबर्ग स्थित प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यास करते हैं। वह भी टॉप्स योजना का हिस्सा हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उन्हें टॉप्स के तहत लगभग 49.92 लाख रुपये और एसीटीसी के तहत लगभग 15.54 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली है।
रिंकू और अजीत की इस दोहरी सफलता ने एशियाई पैरा खेलों में भारत की पदक उम्मीदों को और मजबूत किया है। दोनों खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से साबित किया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।
