भारतीय वायुसेना की कमान संभालने के बाद नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने स्वदेशी लड़ाकू विमानों, आधुनिक हथियारों और देश में विकसित रक्षा तकनीकों को वायुसेना की क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार बताया है। उनका जोर आत्मनिर्भरता के साथ-साथ वायुसेना की युद्धक तैयारी को मजबूत करने पर है। 31 अक्टूबर 2026 को उन्होंने भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया, जो 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। पदभार संभालने के बाद दीक्षित ने कहा कि देश की सुरक्षा परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं और भविष्य के युद्धों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में वायुसेना को आने वाले दशक की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
रिजिजू 31 अक्टूबर को भूटान पहुंचे, जहां पारो हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे, विदेश मंत्री डी.एन. ढुंगेल, वरिष्ठ अधिकारियों और भारत तथा भूटान के राजदूतों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे स्वयं गाड़ी चलाकर उन्हें गेलेफू लेकर पहुंचे। रिजिजू ने इस स्वागत को अपने लिए विशेष सम्मान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि 108 स्तूपों की स्थापना का यह आयोजन गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व का अवसर है। उन्होंने इसे भूटान के राजा की दूरदर्शी पहल भी बताया
इस समारोह की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई। सुबह के समय 58 पारंपरिक तुरहियों की ध्वनि के बीच सामूहिक रूप से ‘ओम मणि पद्मे हुम’ मंत्र का जाप किया गया। यह मंत्र तिब्बती बौद्ध परंपरा में करुणा और दया का प्रतीक माना जाता है। आयोजकों के अनुसार, 108 स्तूपों को एक ही स्थान पर एक साथ स्थापित और अभिषिक्त करने की यह पहल अपने पैमाने के लिहाज से असाधारण है। प्रत्येक स्तूप लगभग 15 मीटर ऊंचा है और इनके भीतर पवित्र अवशेष, धार्मिक ग्रंथ, मंत्र तथा बुद्ध से जुड़ी स्मृतियां रखी जा रही हैं। इन अवशेषों में भारत सहित थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और अन्य देशों से प्राप्त पवित्र सामग्री भी शामिल है
