नई दिल्ली, 02 नवंबर । भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने ब्रुसेल्स में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बाजार पहुंच बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की है। इस समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर होने हैं।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह ब्रसेल्स यात्रा के दौरान यूरोपीय आयोग के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा महानिदेशालय (डीजी ट्रेड) की महानिदेशक डिट्टे जुल जॉर्गनस, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी महानिदेशालय के कोएन डोएन्स और कराधान एवं सीमा शुल्क संघ महानिदेशालय के गेरासिमोस थॉमस से मुलाकात की। इन बैठकों में सीमा शुल्क सहयोग, व्यापार सुगमता और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने की तैयारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने कारोबारियों को समर्थन देने, लेन-देन की लागत को कम करने और वैध व्यापार की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने में कुशल, पारदर्शी एवं डिजिटल रूप से सक्षम सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के महत्व को स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने 27 जनवरी को इस समझौते के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी। इससे चमड़ा, कपड़ा और रत्न एवं आभूषण जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके सचिव ने हीरा उद्योग के हितधारकों से मुलाकात की। इनमें एंटवर्प के हीरा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधि भी शामिल थे।
एंटवर्प (बेल्जियम) को दुनिया की ‘हीरा राजधानी’ कहा जाता है। वैश्विक हीरा मूल्य श्रृंखला, प्रमाणन एवं पता लगाने संबंधी आवश्यकताओं, जिम्मेदारी से हीरों की खरीद तथा भारत के बढ़ते हीरा बाजार और विनिर्माण क्षेत्र से पैदा होने वाले अवसरों पर चर्चाएं की गईं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत और बेल्जियम ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना है। एंटवर्प, मुंबई और सूरत को हीरे के प्रमुख केंद्रों के रूप में मान्यता दी गई है।
