U.S. President Joe Biden delivers remarks at the White House in Washington, U.S. August 3, 2021. REUTERS/Jonathan Ernst
वाशिंगटन, 3 अगस्त । अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग को एएए से घटाकर एए कर दिया है। विशेषज्ञ क्रेडिट रेटिंग में गिरावट को अमेरिका के लिए झटका मान रहे हैं। इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
एएए या ट्रिपल-ए रेटिंग उच्चतम रेटिंग है। ऋण चुकाने की क्षमता के आधार पर एजेंसी या किसी देश को रेटिंग दिया जाता है। इस रेटिंग से परोक्ष रूप से पता चलता है कि देश या कंपनी की आर्थिक स्थिति कैसी है।
रेटिंग का उद्देश्य उधारकर्ता के आर्थिक या वित्तीय स्थिति को दिखाना होता है। जब किसी देश के लिए रेटिंग तय होती है, तो एजेंसियां उनकी रेटिंग निर्धारित करने के लिए आर्थिक विकास, कर राजस्व, सरकारी खर्च, घाटे और ऋण स्तर को देखती हैं। जब निवेशक किसी देश या कंपनी में निवेश करता है, तो इस रेटिंग विश्लेषण करते हैं।
जिन देशों के पास ट्रिपल ए रेटिंग है, माना जाता है कि उनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड को विश्व की तीन प्रमुख रेटिंग एजेंसियों से ट्रिपल-ए रेटिंग प्राप्त है।
अमेरिका के पास अभी मूडीज से ट्रिपल-ए रेटिंग है। एसएंडपी ने 2011 में अमेरिका से उसका एएए छीन लिया था। इसके बाद फिच ने भी अब अमेरिका से ट्रिपल ए की रेटिंग हटा ली है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की रेटिंग गिरने से कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। बताया जा रहा है कि हालिया अमेरिकी डाउनग्रेड से ट्रेजरी में बड़ी बिकवाली होने की संभावना नहीं है या निवेशक के व्यवहार में बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
बता दें कि निवेशकों ने 2011 में एसएंडपी से इसी तरह की गिरावट देखने के बाद भी बिना किसी नुकसान के निवेश जारी रखा। कैपिटल इकोनॉमिक्स के विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिकी बांड बाजारों पर बहुत कम प्रभाव पड़ेगा।
