देश चाणक्य नीति :- माता-पिता भी अपना दायित्व समझें Divya Chinta May 15, 2024 लालयेत पंचवर्षाणी दशवर्षाणी ताडयेत | प्राप्ते टू षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत || यहाँ आचार्य चाणक्य पुत्र-पालन में माता- पिता के दायित्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि पुत्र का पांच वर्ष तक लालन करे | दस वर्ष तक ताडन करे | सोलहवां वर्ष लग जाने पर उसके साथ मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए | आशय यह है कि पंच वर्ष की अवस्था तक ही पुत्र के साथ लाड़-प्यार करना चाहिए | इसके बाद दस वर्षों तक, आर्थात प्रन्द्रह वर्ष की अवस्था तक उसे कठोर अनुशासन में रखना चाहिए | किन्तु जब पुत्र पंद्रह वर्ष की अवस्था पूरी करके सोलहवें में प्रवेश कर जाए, तो वह व्यस्क हो जाता है | फिर उसके साथ एक मित्र की तरह सम्मान का व्यवहार करना चाहिए | Post navigation Previous लगातार तीसरे दिन सस्ता हुआ सोना, चांदी के भाव में तेजीNext वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण में वृद्धि से गरीब वर्ग तक सहायता पहुंचाना हुआ आसान Related Stories पद्मा एकादशी सिखाती है संयम, सेवा और सद्भाव का संदेश देश पद्मा एकादशी सिखाती है संयम, सेवा और सद्भाव का संदेश September 22, 2026 पीएम मोदी ने साझा किया ऋग्वेद का सुभाषित, सुख और मंगल की कामना का दिया संदेश Featured देश पीएम मोदी ने साझा किया ऋग्वेद का सुभाषित, सुख और मंगल की कामना का दिया संदेश September 22, 2026 लोकसभा अध्यक्ष और रक्षामंत्री ने डोल ग्यारस (जलझूलनी एकादशी) पर देशवासियों को दी शुभकामनाएं Featured देश लोकसभा अध्यक्ष और रक्षामंत्री ने डोल ग्यारस (जलझूलनी एकादशी) पर देशवासियों को दी शुभकामनाएं September 22, 2026