नई दिल्ली। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि सदन ने वर्ष 2021 में समाप्त हुए वर्ष के लिए ‘दिल्ली में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम और शमन’ के निष्पादन लेखापरीक्षा पर सीएजी की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में दिल्ली की जनता से जुड़े प्रदूषण और विशेष रूप से वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चर्चा की गई है।
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण का प्रमुख स्रोत है और इसे तत्कालीन दिल्ली सरकार द्वारा नियंत्रित किया जा सकता था। इसके बावजूद तत्कालीन दिल्ली सरकार इसे नियंत्रित करने में विफल रही।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोक लेखा समिति को इस रिपोर्ट की गहन जांच करनी चाहिए और उन व्यक्तियों की पहचान करनी चाहिए जो अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे। रिपोर्ट की सामग्री के अनुसार तत्कालीन सरकार की ओर से गंभीर खामियां की गई प्रतीत होती हैं। पीएसी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और विभागों को एक महीने के भीतर अपने एक्शन टेकन नोट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जैसा कि सीएजी रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि शहरी परिवहन प्रणाली में सुधार, बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से परिवहन मोड में बदलाव, प्रवर्तन प्रणाली को मजबूत करना जैसी कुछ ऐसी रणनीतियां थीं, जिनका उपयोग, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए किया जा सकता था।
रिपोर्ट में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों में विभिन्न कमियों की ओर इशारा किया गया है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं। सरकार के पास वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली के लिए कोई प्रभावी तंत्र या बुनियादी डेटा तक नहीं था। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया और बड़ी संख्या में डीटीसी बसें सड़कों पर नहीं उतरीं। बजट प्रावधान रखने के बावजूद मोनोरेल, लाइट रेल ट्रांजिट या इलेक्ट्रॉनिक ट्रॉली बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के वैकल्पिक तरीकों को शुरू करने के लिए भी कोई पहल नहीं की गई। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्रों में गंभीर अनियमितताएं थीं। प्रदूषण जांच केंद्रों का कोई निरीक्षण नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में 2018-2019 में, 64 प्रतिशत वाहनों का फिटनेस चेक किया जाना था लेकिन उन्होंने फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं लिया और 90 प्रतिशत से अधिक फिटनेस टेस्ट केवल दृश्य निरीक्षण के आधार पर किए गए, जिससे टेस्टिंग की प्रक्रिया व्यर्थ हो गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए अप्रैल 2020 में बीएस-III और बीएस-IV वाहनों का पंजीकरण किया गया। 47.51 लाख अपनी अविध पूरी करने वाले वाहनों में से, जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाना था, उनमें से वास्तव में केवल 2.98 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया। ऑड-ईवन, ट्रकों पर प्रतिबंध, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स की शुरूआत जैसे उपायों को ठीक तरह लागू नहीं किया गया।
विधानभा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा लगता है कि विज्ञापनों और मीडिया में किए गए बेबुनियाद दावों के विपरीत, तत्कालीन सरकार ने दिल्ली के लोगों को वाहनों से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, जिससे जानलेवा बीमारियों सहित गंभीर कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
