नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में विमुक्त एवं अर्ध घुमंतु समाज की प्रतिनिधि कविता राठौड़ सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह बैठक 31 अगस्त को आयोजित होने वाले ‘विमुक्त एवं अर्ध घुमंतु समाज दिवस’ की तैयारियों के सिलसिले में हुई। यह जानकारी गुरुवार को एक बयान में दी।
बैठक में बनजारा, गड़िया, नट, सिख लिगार, मनिहार, लुभाना, गीहरा, सांसी, कलंदर, कालबेलिया, सपेरा और जोगी समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने दिल्ली में ‘घुमंतु विकास बोर्ड’ की स्थापना और जाति प्रमाण पत्र में विमुक्त जनजातियों (डीएनटी) का उल्लेख किए जाने की मांग रखी। इस अवसर पर कपिल मिश्रा ने कहा कि विमुक्त एवं अर्ध घुमंतु समाज हमारे इतिहास और संस्कृति का गौरवशाली हिस्सा रहे हैं। उनकी परंपराएं, संघर्ष और जीवनशैली भारतीय समाज को विशेष पहचान देती हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि इन समुदायों को उनके अधिकार, सम्मान और अवसर पूरी तरह से मिले। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि 31 अगस्त को मनाए जाने वाले ‘विमुक्त एवं अर्ध घुमंतु समाज दिवस’ के लिए दिल्ली सरकार पूरे उत्सव में सक्रिय सहयोग करेगी और भव्य कार्यक्रम का आयोजन करेगी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में समाज के योगदान को प्रदर्शित करने और नई पीढ़ी तक उनकी परंपराओं को पहुंचाने के हर प्रयास में सरकार साथ खड़ी रहेगी।
ब्रिटिश शासनकाल में इन समाजों पर ‘काला कानून’ (क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट) थोप दिया गया था, जिसके कारण इन्हें दशकों तक अन्याय और भेदभाव सहना पड़ा। इन समुदायों को अपराधी मानकर उनकी आज़ादी और गरिमा छीन ली गई थी। लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद 31 अगस्त 1952 को इन्हें स्वतंत्रता प्राप्त हुई और ‘विमुक्त’ का दर्जा दिया गया। तभी से यह दिन समाज की गरिमा और पहचान के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। 31 अगस्त को दिल्ली में ‘विमुक्त एवं अर्ध घुमंतु समाज दिवस’ के अंतर्गत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रदर्शनी और संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज की कला, संस्कृति, वेशभूषा और परंपराओं का प्रदर्शन होगा। यह आयोजन न केवल उनके गौरवशाली इतिहास को याद करेगा बल्कि नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और गर्व का स्रोत भी बनेगा।
