बलरामपुर, 1 दिसंबर । राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम देश को वर्ष 2030 तक पूर्ण साक्षर बनाने के लक्ष्य की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा है। 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2022 से 2027 तक चल रहे इस कार्यक्रम को अब “सबके लिए शिक्षा” के नाम से नई पहचान मिली है।
जिले में सात दिसम्बर को होने वाली राष्ट्रव्यापी महापरीक्षा को लेकर कलेक्टर एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेन्द्र कटारा ने जिलेवासियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष से अधिक आयु के वे सभी शिक्षार्थी, जिन्होंने उल्लास साक्षरता केंद्रों में निर्धारित 200 घंटे के अंतर्गत 7 अध्याय पूरे कर लिए हैं, वे इस परीक्षा में अवश्य भाग लें। सफल परीक्षार्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान (एनआईओएस) एवं राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण (एनआईएलपी) का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
कलेक्टर ने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ समाज के उन वयस्क व्यक्तियों को भी मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है जो किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गए। उल्लास कार्यक्रम इसी उद्देश्य को पूरा करने की राष्ट्रव्यापी पहल है, जो जीवनभर शिक्षा के अधिकार को साकार कर रहा है।
जिला परियोजना अधिकारी हीरालाल पटवा ने बताया कि महापरीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए जिले में 573 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 27603 परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा संचालन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है।
उल्लास कार्यक्रम एक बार फिर जिले के हजारों लोगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने जा रहा है। 7 दिसंबर को साक्षरता की यह अग्निपरीक्षा न केवल ज्ञान, बल्कि आत्मविश्वास की नई शुरुआत साबित होगी।
