23 दिसंबर। भारत 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाएगा, जो उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह दिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को राष्ट्रपति द्वारा दी गई स्वीकृति की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने देश में एक संरचित उपभोक्ता अधिकार ढांचा स्थापित किया।
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 का विषय, “डिजिटल न्याय के माध्यम से कुशल और त्वरित निपटान,” उपभोक्ता विवादों के प्रौद्योगिकी-आधारित, सुलभ और समयबद्ध समाधान पर सरकार के जोर को दर्शाता है। इस अवसर पर उपभोक्ता जागरूकता, डिजिटल शिकायत निवारण, गुणवत्ता आश्वासन और संस्थागत क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से कई पहल, सम्मान और घोषणाएं की जाएंगी।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, जो जुलाई 2020 में लागू हुआ, ने 1986 के कानून को प्रतिस्थापित करके और उभरती बाजार चुनौतियों से निपटने के लिए एक आधुनिक ढांचा पेश करके एक महत्वपूर्ण सुधार किया। यह अधिनियम सूचना के अधिकार, अनुचित व्यापार प्रथाओं से सुरक्षा और प्रभावी निवारण तक पहुंच सहित प्रमुख उपभोक्ता अधिकारों की गारंटी देता है।
उपभोक्ता विवादों का समाधान जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से युक्त त्रिस्तरीय तंत्र के माध्यम से किया जाता है। जुलाई 2025 में, दस राज्यों और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 100 प्रतिशत से अधिक निपटान दर दर्ज की, जो नए दर्ज मामलों की तुलना में मामलों के तेजी से निपटान को दर्शाता है।
जुलाई 2020 में स्थापित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, सामूहिक उपभोक्ता हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अनुचित व्यापार प्रथाओं की निगरानी करता है, भ्रामक विज्ञापनों को नियंत्रित करता है, उत्पाद वापस मंगाने का आदेश देता है और जहां आवश्यक हो, दंड लगाता है।
1 जनवरी, 2025 को ई-जागृति के शुभारंभ ने उपभोक्ता न्याय वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव ला दिया है। यह प्लेटफॉर्म पहले से मौजूद प्रणालियों को एक ही डिजिटल इंटरफेस में एकीकृत करता है, जिससे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, भुगतान और वास्तविक समय में मामलों की ट्रैकिंग संभव हो पाती है।
नवंबर 2025 के मध्य तक, ई-जागृति ने 1.35 लाख से अधिक मामलों को दर्ज करने में सहायता प्रदान की और 1.31 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया, जिसमें अनिवासी भारतीयों सहित 2.81 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं का सहयोग मिला। इस प्लेटफॉर्म ने कार्यकुशलता में भी सुधार किया है, और 2025 में कई महीनों के दौरान निपटारे की दर नए मामलों की संख्या से अधिक रही है।
एआई-सक्षम राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 2.0 ने बहुभाषी सेवाओं, चैटबॉट और शिकायतों के त्वरित निपटान के माध्यम से उपभोक्ता सहायता तक पहुंच का विस्तार किया है। हेल्पलाइन अब प्रतिवर्ष 12 लाख से अधिक शिकायतों का समाधान करती है, जिसमें डिजिटल चैनलों के माध्यम से लगभग 65 प्रतिशत पंजीकरण हुए हैं। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच, विभिन्न क्षेत्रों में 27.61 करोड़ रुपये के रिफंड की सुविधा प्रदान की गई।
भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र जैसी संस्थाएं गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। भारतीय मानक ब्यूरो ने अनिवार्य प्रमाणन का दायरा बढ़ाकर 773 उत्पादों तक कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र परीक्षण परिणामों में लगने वाले समय को कम करने और दक्षता में सुधार के लिए डिजिटल प्रणालियों को अपना रहा है।
2025 में कानूनी मापन नियमों में किए गए हालिया संशोधनों ने पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण, चिकित्सा उपकरण लेबलिंग और ई-कॉमर्स प्रकटीकरण में पारदर्शिता को बढ़ाया है, जिससे उपभोक्ताओं को सूचित विकल्प चुनने के लिए और अधिक सशक्त बनाया गया है।
