27 दिसंबर। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनकर उभरी है, जो पहले सातवें स्थान पर थी। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की विकास गाथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के दृष्टिकोण से प्रेरित है।
श्री वैष्णव ने कहा कि बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (एलएसईएम) के लिए पीएलआई योजना ने 13,475 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया और 9.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन हासिल किया। उन्होंने बताया कि इस योजना ने पिछले 5 वर्षों में 1.3 लाख से अधिक रोजगार सृजित करके इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में विनिर्माण, रोजगार और निर्यात को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दिया है। मंत्री ने कहा कि सरकार अब मॉड्यूल, घटक, सब-मॉड्यूल, कच्चे माल और विनिर्माण मशीनरी की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम इस बदलाव में सहयोग दे रही है, जिसके तहत 249 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 1.15 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 10.34 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और 1.42 लाख रोजगारों का सृजन शामिल है। उन्होंने कहा कि यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है, जो उद्योग जगत के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। श्री वैष्णव ने यह भी बताया कि अब तक दस सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से तीन पहले से ही पायलट या प्रारंभिक उत्पादन चरणों में हैं।
मंत्री जी ने कहा कि पिछले दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने 25 लाख रोजगार सृजित किए हैं, जिसे उन्होंने जमीनी स्तर पर वास्तविक आर्थिक विकास बताया। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट विनिर्माण के विस्तार के साथ रोजगार सृजन में और तेजी आएगी। मेक इन इंडिया पहल के प्रभाव को रेखांकित करते हुए मंत्री जी ने कहा कि तैयार उत्पादों और कंपोनेंट दोनों का उत्पादन बढ़ रहा है, निर्यात में वृद्धि हो रही है, वैश्विक कंपनियां आश्वस्त हैं, भारतीय कंपनियां तेजी से प्रतिस्पर्धी बन रही हैं और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
