ढाका, 31 दिसंबर। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया के जनाज़े को लेकर देशभर में भावनात्मक माहौल बन गया है। बुधवार दोपहर संसद भवन के साउथ प्लाजा में होने वाली नमाज़ से पहले ही हजारों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचने लगे हैं। सुबह चार बजे से ही लोगों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि ख़ालिदा ज़िया केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति की एक पूरी पीढ़ी का प्रतीक थीं। जनाज़े में उमड़ी भीड़ यह साफ दर्शाती है कि सत्ता से बाहर रहने के बावजूद ख़ालिदा ज़िया की जनस्वीकृति आज भी गहरी रही है।
उनकी पार्टी के कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी उन्हें आख़िरी विदाई देने पहुंचे हैं। काले बैज पहने लोगों की भीड़ देश में शोक और सम्मान के साझा भाव को दर्शाती है। सरकार द्वारा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा यह बताती है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद ख़ालिदा ज़िया के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम और कुछ क्षेत्रों में आम लोगों की आवाजाही पर रोक इस बात का संकेत है कि प्रशासन स्थिति की संवेदनशीलता को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
ख़ालिदा ज़िया का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश की राजनीति के उस अध्याय का अंत है, जिसमें सत्ता, संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन एक-दूसरे से जुड़े रहे। उनका जाना ऐसे समय में हुआ है जब देश राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है, और ऐसे में उनका अंतिम सफ़र भी राजनीतिक और भावनात्मक दोनों अर्थों में ऐतिहासिक बन गया है।
