02 जनवरी । पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) बोर्ड ने गुरुवार नए फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है। इसके तहत अब शेड्यूल कमर्शियल बैंक (एससीबी) को एनपीएस को मैनेज करने के लिए पेंशन फंड स्थापित करने की इजाजत दे दी है।
इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और एनपीएस में निवेश करने के लिए लोगों के पास ज्यादा विकल्प होंगे।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि प्रस्तावित ढांचा उन मौजूदा नियामक बाधाओं को दूर करने का प्रयास करता है जिन्होंने अब तक बैंकों की भागीदारी को सीमित कर रखा था।
RBI के मानदंडों के अनुरूप नेट वर्थ, बाजार पूंजीकरण और विवेकपूर्ण सुदृढ़ता के आधार पर स्पष्ट रूप से परिभाषित पात्रता मानदंड लागू करके, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल अच्छी तरह से पूंजीकृत और प्रणालीगत रूप से मजबूत बैंकों को ही पेंशन फंड प्रायोजित करने की अनुमति दी जाए।
बयान में कहा गया, “विस्तृत मानदंड अलग से अधिसूचित किए जाएंगे और ये नए और मौजूदा दोनों पेंशन फंडों पर लागू होंगे।”
PFRDA द्वारा शुरू की गई चयन प्रक्रिया के तहत एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी नियुक्त किए हैं, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा, यूटीआई एएमसी की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष और ट्रस्टी स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक और प्रमुख तथा एसआईडीबीआई द्वारा प्रबंधित फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत राष्ट्रीय वेंचर कैपिटल निवेश समिति के सदस्य डॉ.अरविंद गुप्ता का नाम शामिल हैं।
खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी नामित किया गया है।
बदलती परिस्थितियों, जनता की आकांक्षाओं, अंतरराष्ट्रीय मानकों और कॉरपोरेट, रिटेल और गिग-इकोनॉमी क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से, पीएफआरडीए ने 1 अप्रैल, 2026 से ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए पेंशन फंडों के निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) ढांचे में संशोधन किया है।
आईएमएफ द्वारा संशोधित स्लैब-आधारित नीति में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं, जो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) के अंतर्गत आने वाली योजनाओं पर भी लागू होंगी, हालांकि एमएसएफ कोष की गणना अलग से की जाएगी।
PFRDA को उम्मीद है कि इन नीतिगत सुधारों से ग्राहकों और हितधारकों को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और सुदृढ़ एनपीएस प्रणाली तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति परिणामों में सुधार होगा और वृद्धावस्था में आय सुरक्षा बढ़ेगी।
