05 जनवरी । भारत चावल का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है और उसने चीन को पीछे छोड़ दिया है। यह बात केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल नई दिल्ली में कही। उन्होंने बताया कि भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन है। चौहान ने कहा कि भारत अब विदेशी बाजारों में चावल की आपूर्ति कर रहा है।
मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों का अनावरण किया। इन 184 किस्मों में 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना, 24 कपास और जूट तथा तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि देश ने अधिक उपज देने वाले बीजों के विकास में बड़ी सफलता हासिल की है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये नई किस्में किसानों तक शीघ्रता से पहुंचें। 184 उन्नत किस्मों के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों को इनसे लाभ होगा क्योंकि इनसे अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्च गुणवत्ता वाले बीज प्रत्येक किसान के खेत तक पहुंचें। मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों से दालों और तिलहनों के उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने को भी कहा ताकि भारत आत्मनिर्भर बन सके।
श्री चौहान ने कहा कि उच्च उपज देने वाले और जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी बीजों के विकास के बल पर देश ने कृषि क्रांति के एक नए युग में प्रवेश किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित फसल परियोजनाओं, राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
