10 जनवरी । चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान द्वारा जल्दबाजी में किया गया सैन्य और संवैधानिक पुनर्गठन, संघर्ष के दौरान उजागर हुई उसकी गंभीर कमियों की मौन स्वीकृति थी। जनरल चौहान कल पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल में बोल रहे थे। “प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा” पर एक सत्र को संबोधित करते हुए, सीडीएस ने कहा कि अप्रैल में हुए आतंकी हमले के बाद पिछले साल मई में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को संवैधानिक संशोधन करने के लिए मजबूर किया, जो इस बात की स्वीकारोक्ति है कि पड़ोसी देश के लिए सब कुछ ठीक नहीं रहा। जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल रुका हुआ है
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन से देश के उच्च रक्षा संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया है और उसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) का पद बना दिया है। जनरल चौहान ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीडीएफ की नियुक्ति केवल सेना प्रमुख ही कर सकते हैं – यह कदम संयुक्तता के मूल सिद्धांत के ही विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप एक ही व्यक्ति के हाथों में असाधारण रूप से शक्ति का केंद्रीकरण हो गया है, जो अब थल अभियानों, संयुक्त अभियानों, रणनीतिक बलों और नवगठित रॉकेट बल की देखरेख करता है।
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल इंटरनेट-आधारित युद्ध प्रणाली से डेटा-आधारित युद्ध प्रणाली की ओर अग्रसर हैं, और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा कि उन्नत सेंसर और एआई तकनीकें युद्धक्षेत्र में लगभग पूर्ण पारदर्शिता ला रही हैं, जिससे अचानक हमला करना कठिन होता जा रहा है और विजय के लिए तकनीकी श्रेष्ठता अनिवार्य हो गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल आधुनिक तकनीक का होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सैन्य नेतृत्व को बौद्धिक रूप से भी तैयार रहना चाहिए और बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी कार्यप्रणाली को अनुकूलित करना चाहिए।
रक्षा प्रमुख ने कहा कि भविष्य के संघर्षों में मानव सैनिकों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसलिए उन्होंने स्वदेशी ड्रोन प्रौद्योगिकियों के विकास और मजबूत ड्रोन-रोधी प्रणालियों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।
देश भर के विभिन्न क्षेत्रों के नीति निर्माता और विशेषज्ञ दो दिवसीय उत्सव में भाग ले रहे हैं।
