प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत को सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना होगा। एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि रक्षा सुधारों के एक दशक के लाभ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विश्व में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे भारत का यह कर्तव्य है कि वह वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अपने रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण करे। केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित 78 लाख करोड़ रुपये का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि यह आवंटन पिछले बजट से 15 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने आगे कहा कि यह किसी भी मंत्रालय या विभाग को आवंटित अब तक की सबसे बड़ी राशि है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट भारत की एक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसी मजबूरी से उत्पन्न ‘अभी या कभी नहीं’ वाली स्थिति नहीं है, बल्कि तैयारी और प्रेरणा से उत्पन्न ‘हम तैयार हैं’ वाली स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि बजट में घोषित कर प्रोत्साहन इस क्षेत्र में निवेश को गति देने, उन्नत सुविधाओं के निर्माण की लागत को कम करने और भारत को डेटा अवसंरचना के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार किए गए हैं। उन्होंने विश्व के सभी डेटा को भारत में स्थानांतरित करने का निमंत्रण दिया। उन्होंने आगे कहा कि बजट में घोषित कर प्रोत्साहन इस क्षेत्र में निवेश को गति देने, उन्नत सुविधाओं के निर्माण की लागत को कम करने और भारत को डेटा अवसंरचना के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार किए गए हैं।
श्री मोदी ने अगले दशक के लिए तीन प्राथमिकताएं बताईं: अधिक संरचनात्मक सुधार, नवाचार को बढ़ावा देना और सरल शासन व्यवस्था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार की “सुधार एक्सप्रेस” से आम नागरिकों को व्यापक लाभ मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाएं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और सरकार द्वारा उठाए गए कदम उन्हें सशक्त बनाएंगे।
भारत द्वारा किए जा रहे व्यापार समझौतों पर प्रधानमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक स्थिरता और राजनीतिक पूर्वानुमान ने भारत में निवेशकों का विश्वास बहाल किया है। उन्होंने आगे कहा कि मजबूत विनिर्माण, सेवा और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) ने भारत को मजबूत स्थिति से व्यापार समझौते करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते वस्त्र, चमड़ा, रसायन, हस्तशिल्प, रत्न और अन्य क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने के लिए बनाए गए हैं।
श्री मोदी ने यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत आत्मविश्वास के साथ बातचीत करने में असमर्थ रहा। उन्होंने आगे कहा कि सुधार उनकी सरकार की प्रतिबद्धता है और यह बात अक्षरशः सिद्ध हो चुकी है। आर्थिक परिवर्तन के अगले चरण के लिए निजी क्षेत्र की अहमियत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने उनसे ‘निर्णायक प्रतिक्रिया’ की अपील की। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को लाभ-हानि पर कम ध्यान देना चाहिए और अनुसंधान एवं विकास, आपूर्ति श्रृंखला और गुणवत्ता में आक्रामक रूप से निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की अगली छलांग निजी क्षेत्र द्वारा नवाचार, दीर्घकालिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में किए गए साहसिक निवेश पर निर्भर करेगी।
श्री मोदी ने कहा कि वे कभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते और उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में एक निश्चित रचनात्मक बेचैनी और अधिक करने की निरंतर प्रेरणा आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार की राह में हासिल की गई प्रगति को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों के लिए और अधिक हासिल करने और देश को आगे ले जाने की हमेशा प्रबल इच्छा रहती है।
