NAKURU, KENYA - 2025/06/14: A view of blood samples in test tubes placed on a table during this year's World Blood Donor Day commemorations in Nakuru. World Blood Donor Day is commemorated on 14th June every year to raise global awareness about the need for safe, regular, and voluntary blood donations and to thank blood donors like Sanya Alpha Kennedy, Kenya's top blood donor who give freely and regularly to help many people in dire need of blood products for survival. (Photo by James Wakibia/SOPA Images/LightRocket via Getty Images)
केंद्र सरकार रक्त उत्पादों की जांच प्रक्रिया को सरल और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने डुप्लिकेट वायरल परीक्षण को समाप्त करने के लिए गजट अधिसूचना का मसौदा जारी किया है और इस पर सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए हैं।
मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन ड्रग्स रूल्स 1945 के शेड्यूल एफ, भाग 12-सी के पैरा जी (रक्त उत्पादों की जांच) से संबंधित है। इसका उद्देश्य रक्त उत्पादों की जांच से जुड़े नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना और अनावश्यक परीक्षणों को हटाना है।
क्या है प्रस्तावित बदलाव
प्रस्तावित संशोधन के तहत रक्त उत्पादों में वायरल जांच को वैश्विक फार्माकोपिया मानकों के अनुसार किया जाएगा।
इसके अनुसार मानव प्लाज्मा के पहले पूल की जांच में
हेपेटाइटिस बी सतह एंटीजन
हेपेटाइटिस सी वायरस आरएनए
एचआईवी एंटीबॉडी
जैसे प्रमुख वायरल संकेतकों की जांच अनिवार्य होगी। यदि प्लाज्मा इन सभी परीक्षणों में नकारात्मक पाया जाता है, तभी उसे आगे दवाओं के निर्माण के लिए उपयोग किया जाएगा।
डुप्लिकेट परीक्षण समाप्त होगा
मौजूदा नियमों के तहत पहले से जांच किए गए प्लाज्मा से तैयार अंतिम उत्पाद की दोबारा उसी वायरस के लिए जांच की जाती है। प्रस्तावित संशोधन में इस दोहराव वाली जांच को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार इससे
नियामकीय प्रक्रियाओं में सामंजस्य बढ़ेगा
वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण प्रक्रिया बेहतर होगी
उद्योग पर अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होगा
साथ ही मरीजों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मंत्रालय ने हितधारकों से मसौदे का अध्ययन कर निर्धारित समय सीमा के भीतर सुझाव देने की अपील की है।
देखभाल क्षेत्र में प्रशिक्षण पर भी जोर
सरकार ने हाल ही में 1.5 लाख बहु-कौशल देखभाल कर्मियों को तैयार करने पर भी चर्चा की है, ताकि देश में बढ़ती देखभाल सेवाओं की जरूरतों को पूरा किया जा सके और वैश्विक अवसरों का लाभ उठाया जा सके।
