कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं पर तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन, जो कल नई दिल्ली में संपन्न हुआ, ने कृषि में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली नीतियों और समावेशी नवाचारों को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उद्घाटन किए गए इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सतत कृषि विकास को बढ़ावा देना और कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में महिलाओं को सशक्त बनाना था।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि सम्मेलन में 18 देशों के नीति निर्माता, वैज्ञानिक, उद्यमी और महिला नेता एक साथ आए और कृषि क्षेत्र में महिलाओं के नेतृत्व और उद्यमशीलता को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत कीं। कृषि क्षेत्र में योगदान देने वाली कई सफल महिला किसानों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन सभा को संबोधित करते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एमएल जाट ने जोर दिया कि यह सम्मेलन लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली कृषि-खाद्य प्रणालियों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों सहित 900 से अधिक संस्थानों को जोड़ने के लिए एक राष्ट्रीय लैंगिक मंच पर काम कर रही है। सचिव ने कहा कि यह मंच कृषि में महिलाओं पर केंद्रित अनुसंधान, विस्तार और क्षमता निर्माण पहलों को मजबूत करेगा।
