सूरजपुर, 30 मार्च । शनैः-शनैः बदलती खेती की तस्वीर में अब खेत सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खुशबू भी आमदनी का जरिया बन रही है। सूरजपुर जिले के ग्राम डुमरिया के किसान भोला प्रसाद अग्रवाल ने परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया और गुलाब की खेती को उद्योग का रूप दे दिया। उनकी मेहनत और दूरदृष्टि ने न केवल आय के नए द्वार खोले, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा की एक सशक्त मिसाल भी प्रस्तुत की है।
गुलाब, जो आमतौर पर प्रेम, उत्सव और सम्मान का प्रतीक माना जाता है, अब सूरजपुर के एक किसान के लिए आर्थिक समृद्धि का आधार बन चुका है। शादी-विवाह हो या त्योहार, गुलाब की बढ़ती मांग को अवसर में बदलते हुए भोला प्रसाद अग्रवाल ने वर्ष 2023 में परंपरागत खेती को छोड़ आधुनिक पॉलीहाउस तकनीक अपनाई।
करीब 2 एकड़ भूमि में स्थापित 2 पॉलीहाउस के इस प्रोजेक्ट पर लगभग एक करोड़ 20 लाख रुपये की लागत आई। इसमें 90 लाख रुपये बैंक ऋण, 30 लाख रुपये स्वयं की पूंजी और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से 50 प्रतिशत अनुदान शामिल है। पॉलीहाउस में डच किस्म के लगभग 80 हजार गुलाब पौधे लगाए गए हैं, जो नियंत्रित तापमान और उन्नत पोषण प्रबंधन के कारण पूरे साल उत्पादन देते हैं।
आज इस फार्म से प्रतिदिन औसतन 3 से 4 हजार गुलाब स्टिक का उत्पादन हो रहा है। तैयार फूलों की आपूर्ति बनारस, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न बाजारों में की जा रही है। इससे मासिक औसत आय 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच रही है। श्रमिक, खाद, उर्वरक और रखरखाव जैसे खर्चों के बाद भी यह खेती अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है और स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन चुकी है।
भोला प्रसाद अग्रवाल का कहना है कि पारंपरिक खेती में मौसम का जोखिम अधिक होता है, जबकि पॉलीहाउस तकनीक ने इस जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। नियंत्रित वातावरण में फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
वे अन्य किसानों को संदेश देते हैं कि नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर खेती को उद्योग में बदला जा सकता है। आज उनका यह प्रयास न केवल उनकी आय बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहा है। आधुनिक खेती का यह मॉडल अब क्षेत्र में बदलाव की नई राह दिखा रहा है।
