नई दिल्ली: भारत में कई सालों तक मॉनसून में झमाझम बारिश के दौर के बाद इस साल इंद्रदेव थोड़ा रूठे रह सकते हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भविष्यवाणी की है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून जून से सितंबर के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है. देश में इस साल मॉनसून सीजन के वक्त 80 सेंमी बारिश के आसार हैं. जबकि भारत में मॉनसून की बारिश का 1971 से 2020 तक का रिकॉर्ड देखें तो औसत 87 सेंटीमीटर का रहा है. मॉनसून के चार महीनों में से तीन महीने कम बारिश के अनुमान ने टेंशन बढ़ा दी है, जबकि सितंबर में थोड़ी अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है
मॉनसून में 7 फीसदी तक कम बारिश संभव
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्र ने कहा है कि पूरे देश में मॉनसून की बारिश LPA के 92 फीसदी तक जा सकती है, लेकिन सामान्य से कम बारिश की वजह अल नीनो की की हालात का उभरना है.इससे देश में कम मॉनसूनी बारिश हो सकती है.जून के दौरान अल नीनो की ये स्थिति बनने के आसार हैं. अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में कमजोर ला नीना की स्थिति धीरे-धीरे खत्म होकर सामान्य जलवायु स्थिति में बदल रही है.
मॉनसून के दूसरे चक्र में थोड़ी बेहतरी
दक्षिण पश्चिमी मॉनसून के दूसरे फेज में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल की हालत बन सकती है. PIOD का मतलब है कि हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से यानी अफ्रीकी तट का सामान्य से अधिक गर्म होना और पूर्वी हिस्से में इंडोनेशिया का ठंडा होना चिंताजनक है. ऐसी हालात में हवाएं पूर्व से पश्चिम यानी बंगाल की खाड़ी से अरब सागर की ओर चलती हैं. हिंद महासागर क्षेत्र के समुद्री तापमान में ऐसा बदलाव हो सकता है, जिससे बारिश के सामान्य तौरतरीके में बदलाव आ सकता है.
पॉजिटिव आईओडी से राहत की उम्मीद
पॉजिटिव आईओडी से अधिक बारिश होती है, इसलिए उम्मीद है कि यह मॉनसून के दूसरे चरण में अल नीनो के असर को कम करने में मददगार होगा. उत्तरी गोलार्द्ध में पिछले तीन महीने जनवरी से मार्च के दौरान बर्फबारी भी सामान्य से थोड़ा कम रही. जब भी उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी और वसंत के दौरान बर्फबारी होती है तो भारत में मॉनसून की बारिश आमतौर पर कम हो सकती है. अगर बर्फबारी कम हो तो बारिश अधिक होने की संभावना रहती है. मौसम विभाग मॉनसून की बारिश का पहला पूर्वानुमान अप्रैल बीच में करता है. मई के आखिरी हफ्ते में अपडेट जारी होता है.
