आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर फिर से निशाना साधा। पार्टी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पुराने पत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर जानबूझकर देरी कर रही है और इसे डिलिमिटेशन से जोड़कर प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
कांग्रेस के संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी का रुख शुरू से ही स्पष्ट और अडिग रहा है कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस मांग पर लंबे समय तक निष्क्रिय रही और अब इसे परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जोड़कर टालने की कोशिश कर रही है।
जयराम रमेश ने 2017 में सोनिया गांधी द्वारा लिखे गए पत्र को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को तुरंत पारित करने की अपील की थी। अपने पत्र में सोनिया गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से इस कानून का समर्थन करती रही है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की नींव भी कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी, जिसे बाद में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के रूप में लागू किया गया।
इसके साथ ही कांग्रेस ने राहुल गांधी द्वारा 2018 में प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को तुरंत पारित करने की मांग की थी। राहुल गांधी ने उस पत्र में कहा था कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और इसमें और देरी नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने 2010 में राज्यसभा से पारित महिला आरक्षण बिल को वर्षों से लोकसभा में अटका रखा है। पार्टी का कहना है कि भाजपा ने पहले इस बिल का समर्थन किया था, लेकिन बाद में इसे लागू करने में रुचि नहीं दिखाई।
