आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आज की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है, जो इंटरनेट की तरह ही भविष्य की दिशा तय करने की क्षमता रखती है। यही वजह है कि हर छोटी-बड़ी टेक कंपनी आज एआई से जुड़ना चाहती है और निवेशक इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। लेकिन इस चमक के पीछे एक बड़ी चिंता यह है कि कंपनियों का एआई पर खर्च तो लगातार बढ़ रहा है, मगर उस अनुपात में कमाई नहीं हो रही है। इस स्थिति ने आर्थिक विशेषज्ञों को 1990 के दशक के ‘डॉट-कॉम बबल’ की याद दिला दी है। आर्थिक दुनिया में ‘बबल’ या बुलबुला उसे कहते हैं, जब किसी सेक्टर या कंपनी की कीमत उसकी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक बढ़ जाती है और जब निवेशकों को वास्तविकता का एहसास होता है, तो बाजार अचानक क्रैश हो जाता है।
अगर इतिहास पर नजर डालें, तो 1990 के दशक के मध्य में जब इंटरनेट का दौर शुरू हुआ, तब निवेशकों को लगा कि ऑनलाइन आने वाली हर कंपनी सफल होगी। इसी अंधी दौड़ में बिना किसी मजबूत बिजनेस मॉडल या मुनाफे के, सिर्फ नाम के आगे .com लगाने वाली कंपनियों को भी अरबों डॉलर की फंडिंग मिलने लगी। लेकिन साल 2000 के आते-आते यह भ्रम टूट गया और अमेरिकी शेयर बाजार का नैस्डैक इंडेक्स लगभग 80 प्रतिशत तक गिर गया, जिससे निवेशकों के खरबों डॉलर डूब गए। हालांकि, उस समय भारत पर इसका असर सीमित था क्योंकि तब भारतीय बाजार में इंटरनेट कंपनियों का दबदबा बहुत कम था, जिसके कारण देश किसी बड़ी मंदी से बच गया था।
आज एआई के दौर में भी ठीक वैसी ही समानताएं देखने को मिल रही हैं, जो डॉट-कॉम युग में थीं। पहली बात यह कि कई एआई स्टार्टअप्स का मूल्यांकन (Valuation) उनकी वास्तविक आय की तुलना में बेहद ज्यादा है। दूसरी बात, जिस तरह पहले .com का क्रेज था, आज हर कंपनी अपने उत्पादों को ‘एआई-पावर्ड’ बताकर प्रचारित कर रही है, भले ही उसमें एआई की भूमिका बेहद सीमित हो। इसके अलावा, एआई के लिए जरूरी अत्याधुनिक चिप्स और विशाल डेटा सेंटर्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड तोड़ खर्च किया जा रहा है, लेकिन विश्लेषकों को चिंता है कि क्या भविष्य की कमाई इस भारी निवेश की भरपाई कर पाएगी।
यदि यह एआई बबल फूटता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सबसे पहले टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आएगी, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान होगा और नए स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, आर्थिक दबाव के कारण तकनीकी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका भी बढ़ जाएगी। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि एआई तकनीक खत्म हो जाएगी। इतिहास गवाह है कि डॉट-कॉम क्रैश के बाद हजारों कमजोर कंपनियां जरूर गायब हो गईं, लेकिन इंटरनेट पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली बनकर उभरा और अमेज़न व गूगल जैसी मजबूत कंपनियां टिकी रहीं। ठीक इसी तरह, आने वाले समय में एआई उद्योग भी एक बड़े इम्तिहान से गुजर सकता है, जिसके बाद केवल वही कंपनियां बचेंगी जो वास्तव में दुनिया और व्यापार के लिए वास्तविक वैल्यू पैदा कर रही हैं।
