17 जून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में “नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण करना” विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के निर्माण में ‘विश्वास’ के महत्व पर जोर दिया, विशेष रूप से तेजी से परस्पर जुड़े विश्व में।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने हमेशा मानवता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान जैसी भारत के नेतृत्व वाली पहलों में परिलक्षित होता है। उन्होंने आगे कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत दर्शन पर आधारित है – यानी विश्व एक परिवार है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस समावेशी दृष्टिकोण के कारण ही भारत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के समय सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाला देश रहा है – चाहे वह श्रीलंका में चक्रवात हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोजाम्बिक में बाढ़ हो या जमैका में तूफान हो।
भारत के समावेशी और सतत विकास के बारे में बोलते हुए, श्री मोदी ने विस्तार से बताया कि “सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय” के मंत्र ने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान, प्रौद्योगिकी-आधारित जन सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने में सराहनीय परिणाम दिए हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को दाता-प्राप्तकर्ता के मॉडल से आगे बढ़कर एकजुटता और समान स्वामित्व के मॉडल की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का अनादर अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
