17 जून। तिब्बती बौद्ध परंपरा के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विद्वान, लेखक और दलाई लामा के लंबे समय के मित्र प्रोफेसर रॉबर्ट ए.एफ. थर्मन का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। ‘तिब्बत हाउस यूएस’ ने बुधवार को यह दुखद जानकारी दी।
उनका निधन मंगलवार सुबह 16 जून को न्यूयॉर्क के वुडस्टॉक में हुआ। तिब्बत हाउस यूएस ने अपने आधिकारिक पोस्ट में कहा, “हमें यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि हमारे सह-संस्थापक रॉबर्ट थर्मन का निधन हो गया। वे अमेरिका के प्रमुख बौद्ध विद्वान, लेखक और अनुवादक थे, जिनकी शिक्षाओं ने अनगिनत लोगों के जीवन को संवारा।”
थर्मन परिवार ने इस समय निजता की अपील की है।
भारत से गहरा नाता
प्रोफेसर थर्मन को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। वे भारत के सच्चे मित्र माने जाते थे। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में उनसे मुलाकात की थी और बौद्ध मूल्यों तथा भारत की बौद्ध विरासत संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की थी।
न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए एक्स पर लिखा, “बौद्ध धर्म के दुनिया के सबसे बड़े विद्वानों में से एक और भारत के सच्चे दोस्त प्रोफेसर रॉबर्ट थर्मन के निधन से गहरा दुख हुआ है।”
योगदान
प्रोफेसर थर्मन ‘तिब्बत हाउस यूएस’ और ‘अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज’ के संस्थापक और अध्यक्ष रहे। उन्होंने तिब्बती बौद्ध धर्म पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, संपादित कीं और उनका अंग्रेजी अनुवाद किया। वे ‘विमलकीर्ति सूत्र’ जैसे प्रमुख ग्रंथों के अनुवाद के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
1997 में उन्हें अमेरिका के 25 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया गया था। न्यूयॉर्क मैगजीन ने भी उन्हें धर्म क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों में गिना था।
सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके जीवन भर के तिब्बती बौद्ध अध्ययन एवं संरक्षण के कार्यों की सराहना की।
प्रोफेसर थर्मन की मृत्यु से वैश्विक बौद्ध समुदाय और भारत-तिब्बत सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में एक बड़ा व्यक्तित्व खाली हो गया है।
