नई दिल्ली, 24 जुलाई । आम आदमी पार्टी (आआपा) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट संबंधी कानून लाने के आश्वासन पर सवाल उठाते हुए इसे “खोखला” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसी अदालत में पर्याप्त साक्ष्य ही प्रस्तुत नहीं करेगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही, लेकिन नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा अदालत में कथित तौर पर यह कहे जाने की खबर आई कि आरोपित संजीव मुखिया के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि यदि संजीव मुखिया मास्टरमाइंड नहीं है, तो फिर वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है और यदि कोई मास्टरमाइंड नहीं है तो पेपर लीक की घटना कैसे हुई।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि सरकार की जांच एजेंसियां अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट भी प्रभावी साबित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो पेपर लीक के आरोपितों के खिलाफ मजबूत जांच कर उन्हें कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाता।
केजरीवाल ने कहा कि देशभर के छात्र पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित हुए हैं और सरकार को भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक जांच और अभियोजन की प्रक्रिया प्रभावी नहीं बनाई जाती।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनी रहे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रह सके।
