नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में सरकारी अस्पतालों की डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों के लिए अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने नियम 377 के तहत डिजिटल पंजीकरण और टोकन व्यवस्था को जरूरी भौतिक सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव सरकार के सामने रखा।
अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। डिजिटल पंजीकरण, अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली और टोकन व्यवस्था से मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब अस्पतालों में इससे जुड़ी व्यवस्थाएं भी पूरी तरह कार्यरत हों।
‘डिजिटल टोकन सिर्फ नंबर नहीं, मरीज के सम्मान की गारंटी’
सांसद ने कहा कि डिजिटल टोकन के साथ अस्पतालों में डिस्प्ले स्क्रीन, उद्घोषणा प्रणाली और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे मरीजों को अपनी बारी और आवश्यक जानकारी समय पर मिल सकेगी और अनावश्यक इंतजार कम होगा।
उन्होंने कहा, “डिजिटल टोकन केवल एक संख्या नहीं, बल्कि मरीज को समय पर सुविधा और सम्मान देने की गारंटी बनना चाहिए।” उनके मुताबिक तकनीक के साथ उससे जुड़ी जमीनी व्यवस्थाओं को मजबूत किए बिना डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।
अगली वित्तीय किस्त से पहले सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग
अग्रवाल ने सरकार को सुझाव दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए अगली वित्तीय किस्त जारी करने से पहले संबंधित अस्पतालों में जरूरी उपकरणों की स्थापना और उनका संचालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी जांची जाए।
उन्होंने कहा कि इससे सरकारी धन का बेहतर इस्तेमाल होगा और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी डिजिटल व्यवस्था की सफलता का आकलन केवल जारी किए गए टोकन की संख्या से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रतीक्षा समय में कमी और अस्पताल के बेहतर अनुभव से किया जाना चाहिए।
सांसद ने कहा कि मरीजों की सुविधा, सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना जरूरी है। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है।
