खगोलविदों ने एक संभावित तरीका खोजा है, जिसके जरिए आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल अपने आसपास फैले गैस के विशाल भंडार को प्रभावित कर सकते हैं और इस तरह आकाशगंगा के भविष्य को आकार दे सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्लैक होल से निकलने वाली शक्तिशाली जेट गैस को गर्म और सक्रिय कर सकती हैं, जिससे नए तारों के बनने की प्रक्रिया रुक सकती है।
आकाशगंगा के तारों और धूल से भरे हिस्से के बाहर गैस की एक बहुत बड़ी और बेहद विरल परत फैली होती है। इसे ‘सर्कमगैलेक्टिक मीडियम’ (CGM) कहा जाता है। यह गैसीय क्षेत्र आकाशगंगा में नए तारों के निर्माण के लिए जरूरी ईंधन उपलब्ध कराता है और इसका फैलाव आकाशगंगा के आकार से 10 से 20 गुना तक हो सकता है।
अगर CGM में मौजूद पूरी गैस ठंडी होकर एक साथ जमा हो जाए और तारों में बदलने लगे, तो बहुत बड़ी संख्या में तारों वाली बेहद चमकीली आकाशगंगाएं बननी चाहिए। लेकिन ऐसी आकाशगंगाएं सामान्य रूप से नहीं दिखाई देतीं। वैज्ञानिक लंबे समय से मानते रहे हैं कि आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद विशाल ब्लैक होल से निकलने वाली ऊर्जा गैस को ठंडा होकर तारों में बदलने से रोक सकती है। हालांकि, यह प्रक्रिया किस तरह होती है, इस पर अब तक वैज्ञानिकों में पूरी सहमति नहीं थी।
रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) और अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। RRI विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि ब्लैक होल से निकलने वाली जेट जब CGM में पहुंचती है तो वहां मौजूद गैस से टकराती है। इससे गैस में ऊर्जा पहुंचती है और वह गर्म तथा सक्रिय हो जाती है। ऐसी गैस के कारण वह दोबारा एकत्र होकर नए तारों के निर्माण के लिए जरूरी ठंडी गैस में आसानी से नहीं बदल पाती।
ब्लैक होल को आमतौर पर आसपास की गैस और धूल को निगलने वाले विशाल पिंड के रूप में देखा जाता है, लेकिन वे बेहद गर्म प्लाज्मा की जेट भी बाहर निकाल सकते हैं। प्लाज्मा आवेशित कणों से बना गर्म पदार्थ होता है। शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि क्या ये जेट आकाशगंगा के बाहर मौजूद CGM की गैस को भी प्रभावित करती हैं।
शोधकर्ताओं ने सक्रिय और आयनित गैस से निकलने वाली विशेष रोशनी के संकेत तलाशे। जब उन्होंने आकाशगंगाओं के चारों ओर सभी दिशाओं से मिले आंकड़ों का औसत निकाला तो कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। लेकिन जेट की दिशा में जांच करने पर मजबूत संकेत दिखाई दिया। इससे पता चला कि जेट हर दिशा में गैस को समान रूप से प्रभावित नहीं करती, बल्कि अपने रास्ते में आने वाली गैस को अधिक प्रभावित करती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि यह संकेत दो स्थानों पर सबसे मजबूत था। पहला आकाशगंगा के तारों वाले हिस्से के किनारे पर, जहां जेट पहली बार CGM से टकराती है। दूसरा CGM की बाहरी सीमा पर, जहां धीमी हो चुकी जेट फिर गैस से टकराती है। इस टकराव से ऊर्जा गैस में पहुंचती है और वह गर्म हो जाती है, जिससे तारों के निर्माण की प्रक्रिया दब सकती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ठंडी गैस एकत्र होकर तारों का निर्माण करती है, लेकिन ब्लैक होल से निकलने वाली जेट अपने रास्ते की गैस को गर्म और अस्थिर कर देती है। इससे गैस के एकत्र होने की प्रक्रिया रुकती है और आकाशगंगा में नए तारों का निर्माण कम हो जाता है।
RRI की खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी विभाग की सहायक प्रोफेसर और शोधपत्र की प्रमुख लेखिका नम्रता रॉय ने कहा कि जेट की दिशा में मिले मजबूत संकेत इस बात का प्रमाण देते हैं कि ब्लैक होल से निकलने वाली जेट आसपास की गैस को खास दिशा में प्रभावित करती है। यह शोध आज ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित हुआ है।
एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन की सह-लेखिका संचयीता बोर्थाकुर के अनुसार, इस शोध का व्यापक महत्व यह है कि ब्लैक होल आकाशगंगा के उस छोटे केंद्रीय क्षेत्र से बहुत दूर तक उसके विकास को प्रभावित कर सकते हैं, जहां वे मौजूद होते हैं।
इस तरह, आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद छोटा-सा ब्लैक होल अपनी जेट के जरिए उसके आसपास फैले विशाल गैसीय क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है और नए तारों के निर्माण को सीमित करते हुए आकाशगंगा के भविष्य को आकार दे सकता है।
