विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया कि वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं और हितों का वैश्विक मंच पर पूर्ण प्रतिनिधित्व हो। जापान-भारत-अफ्रीका बिजनेस फोरम को वर्चुअली संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत ने लगातार इस मुद्दे को उठाया है, चाहे वह वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट्स के माध्यम से हो या जी20 प्रेसीडेंसी के माध्यम से। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफ्रीका के प्रति भारत का दृष्टिकोण हमेशा दीर्घकालिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी बनाने की गहरी प्रतिबद्धता से निर्देशित रहा है। उन्होंने बताया कि जुड़ाव के शोषक मॉडल के विपरीत, भारत क्षमता निर्माण, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में विश्वास करता है, यह सुनिश्चित करता है कि अफ्रीकी देश न केवल निवेश से लाभान्वित हों बल्कि आत्मनिर्भर विकास पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित करें।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने अफ्रीका की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता दिखाई है, जिसमें 12 बिलियन डॉलर से अधिक रियायती ऋण और पूरे महाद्वीप में फैली 200 से अधिक पूर्ण परियोजनाएँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पेयजल योजनाओं से लेकर सिंचाई, ग्रामीण सौर विद्युतीकरण और बिजली संयंत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत की विकास परियोजनाओं ने स्थानीय रोजगार पैदा किए हैं और अफ्रीका में जीवन बदल दिया है।
