अमेरिकी सरकार ने Google के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। अब सरकार चाहती है कि Google अपना Chrome ब्राउजर किसी दूसरी कंपनी को बेच दे। इस संबंध में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने एक स्थानीय कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें मांग की गई है कि कोर्ट Google को आदेश दे कि वह अपना ब्राउजर बेच दे और सर्च इंजन के क्षेत्र में कंपनी की मोनोपॉली से जुड़ी सभी गतिविधियां बंद कर दे।
सरकार का तर्क:
सरकार ने अपने कोर्ट दस्तावेज में कहा कि Google बाजार में ऐसी स्थिति बना रहा है, जिसमें उसकी जीत तय होती है, चाहे कुछ भी हो। इसके कारण, अमेरिकी लोग कंपनी की शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इस याचिका का आधार पिछले साल अगस्त में कोर्ट के एक आदेश पर है, जिसमें कहा गया था कि Google ने वेब ब्राउजर्स और स्मार्टफोन कंपनियों को पैसे देकर अपनी मोनोपॉली स्थापित की है। 2023 में हुए एक मुकदमे में यह खुलासा हुआ था कि Google ने 2021 में इन समझौतों के लिए 26.3 बिलियन डॉलर खर्च किए थे।
Google की प्रतिक्रिया:
Google ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने अदालत में अपने जवाब में कहा कि कुछ मामूली सुधार की आवश्यकता है और उसने सुझाव दिया कि उसे प्राइम प्लेसमेंट के लिए समझौते करने की इजाजत दी जाए, लेकिन वह यह शर्त हटाने के लिए तैयार है, जिससे दूसरे सर्च इंजन को इन समझौतों में शामिल किया जा सके। Google के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का यह प्रस्ताव अमेरिकी यूजर्स, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
