वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के बाद सात संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नेतृत्व में कूटनीतिक पहल ने वैश्विक मंच पर भारत की आवाज को सर्वसम्मति से प्रतिध्वनित किया है।
पटना में मीडिया से बात करते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सीमा रेखा से ऊपर के सांसदों को इस सम्मेलन में शामिल करने का निर्णय 140 करोड़ भारतीयों के हित में है। श्री प्रसाद ने कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की इस कूटनीतिक पहल के माध्यम से भारत आतंकवाद के बारे में अपनी चिंताओं तथा आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करने के अपने अधिकार को वैश्विक मंचों पर व्यक्त करने में सक्षम हुआ है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूरोपीय देशों के विभिन्न सांसदों, थिंक टैंकों, मंत्रियों, उपमंत्रियों, विभिन्न शक्तिशाली संसदीय समितियों, भारतीय कॉकस के रूप में जाने जाने वाले भारत समर्थक समूहों, संसदों के प्रमुखों के साथ बैठक करना और उनके समक्ष भारत के विचार प्रस्तुत करना कुछ ऐसा था जो पहले कभी नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि बैठकों के दौरान विदेशी नेताओं, थिंक टैंकों और विभिन्न देशों के अन्य लोगों ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के समक्ष पहलगाम बर्बर हमलों की एक स्वर में निंदा की।
श्री प्रसाद ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल आतंकवाद के खतरों के संबंध में देश की आवाज को वैश्विक समुदाय के समक्ष उठाने तथा यह तथ्य स्थापित करने में सफल रहा कि आतंकवाद का केन्द्र पाकिस्तान है।
उन्होंने कहा कि सांसदों के सात प्रतिनिधियों में से केवल दो भाजपा से थे और बाकी जेडी(यू) तथा कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी, डीएमके जैसे अन्य विपक्षी दलों से थे, यह एनडीए सरकार की सकारात्मकता को दर्शाता है।
श्री प्रसाद ने आगे कहा कि इससे यह भी स्थापित हो गया है कि देश के सभी दलों और मंचों में भारतीय राजनीतिक नेतृत्व आतंकवाद, भारत की विदेश नीति और 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की आवाज के संबंध में एकमत हैं।
