नई दिल्ली। दिल्ली के महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने आम आदमी पार्टी (आआपा) नेताओं द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अनुसूचित जातियों के कल्याण एवं उनके कोटे से जुड़ी तदर्थ समिति को लेकर आम आदमी पार्टी जो बातें कर रही है, वह पूरी तरह से झूठ और राजनीति से प्रेरित हैं।
महापौर ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी को इन समितियों की इतनी ही चिंता थी, तो वो खुद सत्ता में रहते हुए ढाई साल तक इनका गठन क्यों नहीं कर पाई? उन्होंने आरोप लगाया कि आप पार्टी ने जानबूझकर अनुसूचित जाति कल्याण से जुड़ी समितियों का गठन नहीं होने दिया। यही नहीं, उन्होंने ये भी कहा कि आम आदमी पार्टी अब भी नहीं चाहती कि इन तदर्थ समितियों का गठन हो और इसलिए वे बेबुनियाद आरोप लगाकर मुद्दे को भटका रही हैं।
राजा इकबाल सिंह ने कहा कि आप पार्टी न तो संविधान को मानती है, न ही नियमों को। इसी वजह से वे लगातार वैधानिक प्रक्रियाओं का विरोध करते हैं और निगम में होने वाले जरूरी कामों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि निगम सदन में विशेष समितियों और तदर्थ समितियों से जुड़े प्रस्ताव पूरे नियमों के तहत पारित किए गए हैं और उसमें कुछ भी गलत नहीं है।
महापौर ने आम आदमी पार्टी पर यह भी आरोप लगाया कि उनकी मानसिकता दलित विरोधी है। उन्होंने याद दिलाया कि जब महापौर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, तब आप पार्टी ने चुनाव को जानबूझकर टालकर दलित प्रतिनिधि के कार्यकाल को कम कर दिया।
राजा इक़बाल सिंह ने कहा कि आप पार्टी का असली मकसद यही है कि न खुद काम करें और न दूसरों को करने दें। आम आदमी पार्टी सत्ता में रहते हुए खुद समितियों का गठन नहीं करना चाहती थी और अब जब दूसरे लोग नियम के अनुसार काम कर रहे हैं, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश कर रही है। महापौर ने कहा कि यह पूरी तरह संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।
