नई दिल्ली। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और अफसरों के खिलाफ विजिलेंस के एक मामले में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर ली है। स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने कहा कि लंबी जांच के बावजूद सीबीआई को कोई साक्ष्य नहीं मिला।
मामला नियमों के विरुद्ध पीडब्ल्यूडी विभाग में प्रोफेशनल्स की भर्ती में कथित अनियमितता का था। कोर्ट ने कहा कि जांच में किसी भई आपराधिक गतिविधि या सार्वजनिक धन को नुकसान पहुंचाने का कोई सबूत नहीं मिला। इस मामले में सीबीआई ने 29 मई 2019 में एफआईआर दर्ज किया था। सीबीआई ने सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर एफआईआर दर्ज किया था। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि पीडब्ल्यूडी में एक निजी कंपनी को टेंडर दिलाने के लिए टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव किया गया ताकि वो कंपनी इसकी पात्र बन सके। हालांकि एफआईआर दर्ज करने के चार साल के जांच के बाद सीबीआई ने पाया कि न तो कोई वित्तीय लाभ हुआ और न कोई साजिश सामने आयी और न ही किसी सार्वजनिक कर्मचारी द्वारा कोई धोखाधड़ी का मामला पाया गया। जिन्हें चुना गया वे उसके पात्र थे।
क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि जिन पेशवेरों की सेवाएं पहले बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट में ली गई थीं, उन्हें बाद में प्राथमिकता वाले मोहल्ला क्लीनिक प्रोजेक्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। इसका पूरा खर्च दिल्ली सरकार वहन कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि जब इतने लंबे समय तक जांच के बावजूद कोई आपराधिक साक्ष्य सामने नहीं आया तो आगे की कार्यवाही का कोई मतलब नहीं है।
