चुनाव आयोग ने दोहराया है कि कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन किसी भी वोट को नहीं हटा सकता। आयोग ने कहा कि कर्नाटक के अलंद में किसी भी मतदाता का वोट गलत तरीके से नहीं हटाया गया है।
इसमें कहा गया है कि 2023 में ही ईसीआई के प्राधिकार द्वारा संदिग्ध प्रविष्टियों को हटाने के प्रयास के विरुद्ध एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। चुनाव आयोग ने कहा कि यद्यपि किसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता उस विशेष निर्वाचन क्षेत्र से किसी प्रविष्टि को हटाने के लिए ऑनलाइन फॉर्म 7 भर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केवल फॉर्म 7 जमा करने से प्रविष्टि स्वतः ही हट जाती है।
इसमें कहा गया है कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार, प्रभावित व्यक्ति को नोटिस जारी किए बिना तथा उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना नामावली से कोई नाम नहीं हटाया जा सकता।
आयोग ने बताया कि आलंद के मामले में, नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 में छह हज़ार 18 आवेदन ऑनलाइन जमा किए गए थे। सत्यापन में केवल 24 आवेदन ही सही पाए गए, जबकि पाँच हज़ार 994 आवेदन गलत पाए गए।
तदनुसार, 24 आवेदन स्वीकार किए गए। इसमें कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने के आवेदनों की सत्यता पर संदेह होने पर, जांच की गई और तत्पश्चात निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, अलंद द्वारा एक प्राथमिकी दर्ज की गई।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर के राजुरा में नए मतदाता पंजीकरण के लिए कुल सात हजार 792 आवेदन प्राप्त हुए। सत्यापन के बाद, छह हजार 861 आवेदन अवैध पाए गए और उन्हें अस्वीकार कर दिया गया।
इतनी बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों की वास्तविकता पर संदेह होने पर, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, राजुरा द्वारा जांच की गई और एफआईआर दर्ज की गई।
