कार्नेगी ग्लोबल टेक्नोलॉजी समिट इनोवेशन डायलॉग 2025 में ग्लोबल साउथ के विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य, इसके सामाजिक प्रभाव और महाद्वीपों के बीच सहयोग के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा की।
अफ्रीका और भारत के नेताओं ने साझा चुनौतियों, क्षेत्रीय ताकतों और एक समावेशी, विस्तार योग्य एआई पारिस्थितिकी तंत्र की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
एआई अर्थव्यवस्था में ग्लोबल साउथ की सामूहिक ताकत
Qualla के सीईओ शिकोह गीताऊ ने कहा कि ग्लोबल साउथ—जहाँ दुनिया की 80% आबादी रहती है—एआई अर्थव्यवस्था में एक बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास अपने डेटा सेट, अपनी विशाल जनसंख्या और दुर्लभ खनिज जैसी संपत्तियाँ हैं। हम एआई अर्थव्यवस्था को बहुत कुछ दे सकते हैं।”
गीताऊ ने अफ्रीका और एशिया की चुनौतियों की समानता को रेखांकित करते हुए कहा कि साझा सीख और सहयोग दोनों क्षेत्रों में विकास को तेज़ कर सकता है।
भारत को एआई प्रतिभा का “बड़ा भाई” बताते हुए उन्होंने talentindex.ai की रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसके अनुसार भारतीय विशेषज्ञ दुनिया भर के नवाचार केंद्रों—सिलिकॉन वैली से लेकर यूरोप तक—को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने अफ्रीका के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अनुभव—जैसे पहचान प्रणाली का डिजिटलीकरण और कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने—को भी महत्वपूर्ण बताया।
युवाओं और महिलाओं को एआई कौशल देना होगा प्राथमिकता
Women Training Institute की संस्थापक शेली सेठी ने कहा कि भारत का अगला विकास चरण उभरती तकनीकों तक सर्वव्यापक पहुँच सुनिश्चित करने पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और युवाओं में एआई साक्षरता बढ़ाना जरूरी है।
सरकार की स्किल-बिल्डिंग योजनाएँ एआई-आधारित अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका को मजबूत कर सकती हैं।
सेठी के अनुसार, “नई तकनीकों को समझना, सीखना और जमीनी स्तर पर इस्तेमाल में लाना बेहद जरूरी है।”
मातृ स्वास्थ्य में एआई—गंभीर सूचना अंतर को दूर करने का साधन
SimPPL की सह-संस्थापक द्वार मुंगरा ने बताया कि एआई भारत में मातृ मृत्यु दर को प्रभावित करने वाली सूचना संबंधी कमियों को दूर कर सकता है।
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को सही चिकित्सा जानकारी समय पर न मिलना एक बड़ा जोखिम है।
इस चुनौती के समाधान के रूप में SimPPL का ‘सखी’, एक एआई-सक्षम टूल, स्थानीय भाषाओं में व्हाट्सएप पर स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित चिकित्सा जानकारी उपलब्ध कराता है।
मुंगरा ने कहा कि इससे “सही जानकारी मिल पाने में होने वाली देरी कम हो रही है।”
उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के बड़े उपयोग—बीमारियों की पहचान, सरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच—की संभावना भी बताई, लेकिन यह चेतावनी भी दी कि भारत को अपनी भाषाई विविधता के अनुरूप मूलभूत एआई मॉडल बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
भारत—एआई के बड़े पैमाने पर परीक्षण और तैनाती का मॉडल
EkStep Foundation की मुख्य रणनीतिकार शालिनी कपूर ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर एआई तैनाती के लिए एक आदर्श “टेस्टिंग ग्राउंड” बन सकता है।
नंदन नीलेकानी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में विकसित प्रमाणित प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर अपनाया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का वास्तविक प्रभाव कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं में ठोस, जमीनी उपयोग के उदाहरणों से आएगा—जिन्हें भाषा तकनीक, मजबूत सुरक्षा ढांचे और “एआई-तैयार डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर” का समर्थन मिलना चाहिए।
कपूर ने लोकतांत्रिक एआई विकास की पहलों जैसे—
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इंडियाAI मिशन के तहत स्टार्टअप्स को GPU एक्सेस
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AI4Bharat के 22 भारतीय भाषाओं के लिए तैयार ओपन मॉडल
—की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, “एआई सभी के लिए है। किसी को भी पीछे नहीं छूटना चाहिए।”
भारत का यह दृष्टिकोण ग्लोबल साउथ के लिए एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की तैयारी
कार्नेगी इंडिया ने 11 दिसंबर को नई दिल्ली में इस इनोवेशन डायलॉग की मेजबानी की, जो AI Impact Summit 2026 के पूर्व-शिखर कार्यक्रम के रूप में आयोजित हुआ।
यह समिट 15–20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
