कुछ समय पहले तक हांगकांग का शेयर बाजार सुस्ती के दौर से गुजर रहा था। चीन की आर्थिक मंदी का असर साफ दिख रहा था—डील बुक्स खाली थीं, निवेशकों का भरोसा कमजोर था और कई बैंकर इस इंडस्ट्री को छोड़ रहे थे। लेकिन वर्ष 2025 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और हांगकांग ने फंड जुटाने के मामले में एशिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है।
IPO, प्लेसमेंट और ब्लॉक ट्रेड के जरिए हांगकांग शेयर बाजार में इक्विटी बिक्री करीब चार गुना बढ़कर 73 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गई है। साल 2013 के बाद यह पहली बार है जब हांगकांग एशिया का सबसे बड़ा फंडरेजिंग हब बना है। वैश्विक स्तर पर फंड जुटाने के मामले में हांगकांग अब केवल अमेरिका से पीछे है, जबकि इस सूची में भारत दूसरे नंबर पर है।
चीनी कंपनियों से मिली मजबूती
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, हांगकांग बाजार में आई इस जबरदस्त तेजी के पीछे चीनी कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है। वैश्विक विस्तार के लिए चीनी कंपनियों ने यहां कई बड़े सौदे किए। उदाहरण के तौर पर, बैटरी निर्माता Contemporary Amperex Technology (CATL) ने मई में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी लिस्टिंग के जरिए 5.3 अरब डॉलर जुटाए।
इसी तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी BYD और स्मार्टफोन निर्माता Xiaomi Corp. ने भी शेयर प्लेसमेंट के जरिए 5 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बावजूद डील-मेकिंग की रफ्तार पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
हांगकांग बाजार की मजबूत रफ्तार
गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक. में (जापान को छोड़कर) एशिया के इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख जेम्स वांग ने कहा कि यह साल उम्मीदों से कहीं बेहतर रहा है और आगे भी वॉल्यूम में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है, हालांकि रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।
फंड जुटाने की यह तेजी पूरे एशिया में देखने को मिली है। दुनिया के पांच सबसे बड़े शेयर सेल लोकेशंस में से चार एशिया में ही हैं—हांगकांग पहले स्थान पर है, उसके बाद भारत, चीन और जापान आते हैं।
हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज के अनुसार, IPO पाइपलाइन भी मजबूत बनी हुई है और करीब 300 कंपनियां लिस्टिंग की तैयारी में हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित बड़े IPOs में Syngenta Group और A.S. Watson Group शामिल हैं। इसके अलावा, चीन की कई AI कंपनियों की लिस्टिंग की भी उम्मीद जताई जा रही है।
इस साल हैंग सेंग इंडेक्स 29.5 प्रतिशत चढ़ चुका है, जो 2017 के बाद इसका अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।
भारत भी पीछे नहीं
डील-मेकिंग के मामले में भारत एशिया में दूसरे नंबर पर बना हुआ है। लॉ फर्म सिरिल अमरचंद मंगलदास के कैपिटल मार्केट्स प्रमुख मनन लाहोटी के अनुसार, भारत में अब पहले से कहीं ज्यादा बिलियन-डॉलर डील्स देखने को मिल रही हैं और इस साल फाइलिंग व लॉन्च की संख्या पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
घरेलू म्यूचुअल फंड्स और रिटेल निवेशकों से बढ़ते निवेश के कारण भारत में IPO बाजार ने लगातार दूसरे साल रिकॉर्ड बनाया है, जहां 20 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई गई। इसके साथ ही मौजूदा शेयरहोल्डर्स ने भी बड़े पैमाने पर ब्लॉक ट्रेड्स के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेची है।
