भारत के स्वदेशी रेल विनिर्माण को एक और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने मोज़ाम्बिक के लिए 3300 हॉर्स पावर AC–AC डीज़ल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का छठा इंजन सफलतापूर्वक निर्यात कर दिया है। सरकार ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, BLW को मोज़ाम्बिक के लिए ऐसे कुल 10 लोकोमोटिव के निर्माण और निर्यात का ऑर्डर मिला है। यह आपूर्ति M/s RITES के माध्यम से किए गए अनुबंध के तहत की जा रही है।
अब तक कितने लोकोमोटिव भेजे गए?
मंत्रालय ने बताया कि
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पहले दो लोकोमोटिव जून 2025 में भेजे गए थे
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तीसरा सितंबर 2025 में
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चौथा अक्टूबर 2025 में
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पांचवां 12 दिसंबर को
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और छठा लोकोमोटिव 16 दिसंबर को मोज़ाम्बिक रवाना किया गया
लोकोमोटिव की खासियतें
BLW द्वारा निर्मित ये 3300 HP केप गेज (1067 मिमी) लोकोमोटिव अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से संचालन में सक्षम हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इनमें कई ड्राइवर-फ्रेंडली सुविधाएं दी गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
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रेफ्रिजरेटर
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हॉट प्लेट
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मोबाइल होल्डर
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आधुनिक और एर्गोनॉमिक कैब डिज़ाइन
इन सुविधाओं से चालक की सुविधा और संचालन दक्षता दोनों में सुधार होता है।
BLW बन रहा है निर्यात केंद्र
वाराणसी स्थित बनारस लोकोमोटिव वर्क्स, जो भारतीय रेलवे के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, तेजी से लोकोमोटिव निर्माण के एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है।
स्वदेशी डिज़ाइन और उन्नत रेलवे तकनीक के क्षेत्र में विशेषज्ञता के बल पर BLW वैश्विक रेलवे बाजार में भारत की मौजूदगी को लगातार मजबूत कर रहा है।
पहले भी कई देशों को हो चुका है निर्यात
वर्ष 2014 से अब तक BLW ने श्रीलंका, म्यांमार और मोज़ाम्बिक जैसे देशों को लोकोमोटिव निर्यात किए हैं, जिससे इन देशों की रेल अवसंरचना को मजबूती मिली है।
मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड के विजन के अनुरूप, यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय रेलवे दुनिया की विभिन्न गेज प्रणालियों के लिए रोलिंग स्टॉक को डिज़ाइन, निर्माण और आपूर्ति करने में सक्षम है।
वैश्विक बाजार में भारतीय रेलवे की बढ़ती मौजूदगी
भारतीय रेलवे अब तक मेट्रो कोच, पैसेंजर कोच, बोगियां, लोकोमोटिव और अन्य महत्वपूर्ण रेलवे उपकरण यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देशों को निर्यात कर चुका है।
अफ्रीकी देशों में मोज़ाम्बिक के अलावा गिनी गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। वहीं एशिया और अन्य क्षेत्रों में म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों को भी रेलवे उपकरणों का निर्यात किया गया है।
