ऊर्जा आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक विकास और मानव कल्याण का आधार है। यह औद्योगिक उत्पादन, परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी और घरेलू जरूरतों को संभव बनाती है। भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो यह दर्शाता है कि गतिशीलता, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों में पेट्रोलियम की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।
साथ ही, 2035 तक भारत की ऊर्जा मांग लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेजी से बढ़ने का अनुमान है। 2050 तक वैश्विक अतिरिक्त ऊर्जा मांग में भारत की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है, जो किसी भी देश में सबसे अधिक होगी।
इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत ने नीति सुधारों, अवसंरचना विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा मार्गों के माध्यम से अपनी ऊर्जा प्रणाली को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। जून 2025 में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब उसकी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म (non-fossil fuel) स्रोतों से आया, जो पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के 2030 लक्ष्य से पांच वर्ष पहले था।
हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सुधार, ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा की तेज़ वृद्धि मिलकर आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारत की बदलती भूमिका को समर्थन दे रहे हैं।
हाइड्रोकार्बन ऊर्जा शासन और क्षेत्रीय सुधार
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग के साथ, ऊर्जा परिवर्तन की सफलता केवल अवसंरचना विस्तार और स्वच्छ ईंधनों पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में शासन और नियामक ढांचे की मजबूती पर भी निर्भर करती है। स्पष्ट नीतियां, पूर्वानुमेय नियम और सुव्यवस्थित अनुमोदन प्रक्रियाएं निवेश आकर्षित करने, परियोजना समयसीमा घटाने और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
इसी पृष्ठभूमि में, भारत ने ऊर्जा शासन को आधुनिक बनाने और बदलती बाजार स्थितियों व ऊर्जा परिवर्तन की आवश्यकताओं के अनुरूप करने के लिए कई सुधार किए हैं।
भारत का हाइड्रोकार्बन क्षेत्र अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम खंडों में विभाजित है।
अपस्ट्रीम खंड तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन से जुड़ा है।
मिडस्ट्रीम खंड ईंधन के परिवहन और भंडारण को कवर करता है।
डाउनस्ट्रीम खंड में रिफाइनिंग और वितरण शामिल है।
इन सभी खंडों में किए गए सुधारों का उद्देश्य दक्षता बढ़ाना, आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करना और स्वच्छ ऊर्जा प्रणाली की ओर क्रमिक संक्रमण को समर्थन देना है।
अपस्ट्रीम सेक्टर में सुधार
ऑयलफील्ड (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) संशोधन अधिनियम, 2025:
ORDA (संशोधन) अधिनियम, 2025 ने भारत के अपस्ट्रीम नियामक ढांचे को आधुनिक बनाया है। इसमें प्रक्रियाओं को सरल करना, एकीकृत ऊर्जा विकास को सक्षम बनाना और निवेशकों का विश्वास मजबूत करना शामिल है। इस सुधार का उद्देश्य घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करना और एक स्थिर व पारदर्शी नीति वातावरण तैयार करना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025:
ये नियम तेल और प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन के लिए एक आधुनिक और पारदर्शी नियामक ढांचा प्रदान करते हैं। इससे ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में सुधार, नियामक निश्चितता में वृद्धि और भारत के ऊर्जा सुरक्षा उद्देश्यों को समर्थन मिलता है।
ORDA (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लागू होने और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 की अधिसूचना के साथ इस क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए। हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत 3.78 लाख वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में फैले 172 ब्लॉकों का आवंटन किया गया, जिससे लगभग 4.36 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित हुआ। भूकंपीय सर्वेक्षण, ड्रिलिंग कार्यक्रम और सरकार द्वारा वित्तपोषित पहलों के माध्यम से खोज गतिविधियों में तेजी आई।
मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम सुधार
इन क्षेत्रों में सुधार का फोकस ईंधन परिवहन, मूल्य पारदर्शिता और बाजार तक पहुंच में सुधार पर रहा है।
यूनिफाइड पाइपलाइन टैरिफ (UPT):
वर्ष 2023 में “वन नेशन, वन ग्रिड, वन टैरिफ” के तहत UPT की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य गैस परिवहन लागत में क्षेत्रीय असमानता को दूर करना था। इस प्रणाली ने दूरी आधारित पुराने टैरिफ ढांचे को बदलकर राष्ट्रीय गैस ग्रिड में परिवहन शुल्क को मानकीकृत किया। दिसंबर 2025 तक लगभग 90 प्रतिशत परिचालित पाइपलाइनों को UPT के तहत कवर किया गया, जिससे प्राकृतिक गैस की किफायत और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी।
अवसंरचना विस्तार के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
शासन सुधारों के साथ-साथ देशभर में ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार पर भी ध्यान दिया गया है, जिससे ईंधन आपूर्ति श्रृंखला, गैस कनेक्टिविटी और गतिशीलता प्रणालियों में सुधार हुआ है।
ईंधन और गैस अवसंरचना
2014 में लगभग 52,000 ईंधन खुदरा केंद्रों से बढ़कर 2025 में इनकी संख्या एक लाख से अधिक हो गई, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अंतिम छोर तक ईंधन उपलब्धता बेहतर हुई।
स्वच्छ ईंधन अवसंरचना में तेज़ वृद्धि हुई। CNG स्टेशनों की संख्या लगभग 968 से बढ़कर 8,477 से अधिक हो गई, जबकि PNG घरेलू कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.59 करोड़ से अधिक हो गए।
“वन नेशन, वन गैस ग्रिड” की परिकल्पना के तहत प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क 25,400 किमी से अधिक हो गया, और 10,459 किमी अतिरिक्त पाइपलाइन निर्माणाधीन है।
एकीकृत गैस ग्रिड के कारण सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का 100 प्रतिशत भौगोलिक कवरेज संभव हुआ।
पेट्रोलियम मार्केटिंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अवसंरचना
90,000 से अधिक खुदरा केंद्रों पर डिजिटल भुगतान सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिन्हें 2.71 लाख से अधिक POS टर्मिनलों का समर्थन प्राप्त है।
3,200 से अधिक फ्यूल बाउज़र चालू किए गए, जिससे विशेषकर दूरदराज़ और कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में डोर-टू-डोर ईंधन आपूर्ति का विस्तार हुआ।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अवसंरचना के तहत FAME Phase-II योजना के अंतर्गत 8,932 EV चार्जिंग स्टेशन खुदरा केंद्रों पर लगाए गए, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा 18,500 से अधिक अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए।
लॉजिस्टिक्स और वे-साइड सुविधाएं
500 से अधिक APNA GHAR ट्रकर्स वे-साइड सुविधाएं स्थापित की गईं, जिससे सड़क सुरक्षा, विश्राम सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स श्रमिकों के कल्याण में सुधार हुआ।
1 नवंबर 2025 तक 1,064 एकीकृत ऊर्जा स्टेशन चालू किए गए, जहां पारंपरिक ईंधनों के साथ वैकल्पिक ऊर्जा विकल्प भी उपलब्ध हैं।
स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और कम-कार्बन मार्ग
ऊर्जा तक पहुंच और अवसंरचना विस्तार ने भारत की ऊर्जा प्रणाली के लिए भौतिक आधार तैयार किया है। अब ध्यान ऊर्जा उपयोग की कार्बन तीव्रता को कम करते हुए बढ़ती मांग को पूरा करने पर केंद्रित है।
भारत स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को विविध दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रहा है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के साथ वैकल्पिक और कम-कार्बन ईंधन शामिल हैं। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 2014 से अब तक लगभग ₹1.59 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत, 813 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी और 270 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन हुआ है।
जैव ईंधन पारंपरिक ईंधनों और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं, जिससे मौजूदा वाहन और ईंधन अवसंरचना में बड़े बदलाव किए बिना उत्सर्जन में कमी संभव होती है। इसके साथ-साथ भारत ग्रीन हाइड्रोजन, सतत ईंधन और अन्य उभरती कम-कार्बन तकनीकों को भी बढ़ावा दे रहा है।
इथेनॉल मिश्रण और जैव ईंधन नीति
राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 (2022 में संशोधित) के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से आगे बढ़ाकर ESY 2025–26 कर दिया गया। 31 जुलाई 2025 तक औसत इथेनॉल मिश्रण 19.05 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि जुलाई 2025 में यह 19.93 प्रतिशत रहा।
स्वच्छ खाना पकाने की ऊर्जा
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत स्वच्छ खाना पकाने की ऊर्जा तक पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। जनवरी 2026 तक लाभार्थियों की संख्या लगभग 10.41 करोड़ हो गई। LPG कवरेज को संतृप्त करने के लिए FY 2025–26 में 25 लाख अतिरिक्त LPG कनेक्शन जारी करने को मंजूरी दी गई है।
PMUY लाभार्थियों के लिए 14.2 किग्रा सिलेंडर पर ₹300 की लक्षित सब्सिडी (साल में अधिकतम 9 रिफिल तक) दी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप LPG उपयोग में निरंतर वृद्धि हुई है, जहां प्रति व्यक्ति औसत खपत 2019–20 में लगभग 3 रिफिल से बढ़कर FY 2025–26 में 4.85 रिफिल प्रति वर्ष हो गई।
सतत विमानन ईंधन (SAF)
केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल में SAF के लिए संकेतात्मक मिश्रण लक्ष्य तय किए हैं:
2027 से 1 प्रतिशत
2028 से 2 प्रतिशत
2030 से 5 प्रतिशत
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड SAF उत्पादन के लिए ISCC-CORSIA प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी, जिसके बाद एयर इंडिया के साथ SAF आपूर्ति के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत का वैश्विक ऊर्जा नेतृत्व और भविष्य की प्रतिबद्धता
भारत का ऊर्जा संक्रमण जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंचों में भागीदारी का महत्व भी बढ़ा है। ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (GBA) और G20 एनर्जी ट्रांजिशन वर्किंग ग्रुप जैसे मंचों में भारत की सक्रिय भूमिका उसके व्यावहारिक और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
इंडिया एनर्जी वीक एक अंतरराष्ट्रीय संवाद मंच के रूप में उभरा है, जहां सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थान और तकनीकी प्रदाता ऊर्जा बाजार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक और संक्रमण मार्गों पर चर्चा करते हैं।
इंडिया एनर्जी वीक (IEW)
इंडिया एनर्जी वीक 2026, 27–30 जनवरी 2026 तक गोवा में आयोजित हो रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आयोजित यह आयोजन उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के दृष्टिकोण से वैश्विक ऊर्जा संवाद में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
2023 में शुरू हुआ इंडिया एनर्जी वीक अब वैश्विक ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में अंतरराष्ट्रीय संवाद का एक प्रमुख मंच बन चुका है। IEW 2026 में 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 6,500 से अधिक सम्मेलन प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन कार्यक्रम में ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा समानता और तेल-गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, जैव ईंधन, कार्बन कैप्चर, बिजली प्रणालियों और भविष्य की मोबिलिटी जैसे विषयों पर नीति और कार्यान्वयन स्तर की चर्चाएं शामिल हैं।
हाल के वर्षों में भारत की ऊर्जा प्रणाली में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। नीति सुधारों, अवसंरचना विस्तार और लक्षित स्वच्छ ऊर्जा पहलों ने ऊर्जा तक पहुंच को मजबूत किया है, प्रणाली की स्थिरता बढ़ाई है और उत्सर्जन तीव्रता को कम किया है। हाइड्रोकार्बन शासन, गैस कनेक्टिविटी, ईंधन व मोबिलिटी अवसंरचना, जैव ईंधन और स्वच्छ खाना पकाने में हुई प्रगति भारत के ऐसे ऊर्जा संक्रमण को दर्शाती है, जो बढ़ती ऊर्जा मांग के साथ-साथ विकास और समावेशन को संतुलित करता है।
