An Indian made nuclear power plant at Rawatbhata in Rajasthan created history by running un-interrupted and continuously for a period 765 days a little over two years. The 220 MW reactor's achievement beats an American reactor which ran for 739 days at one stretch. Unit-5 at Rajasthan a Pressurized Heavy Water Reactor (PHWR) made in 2010 now takes on the global rank number two. The pole position is still held by a Canadian reactor, Ontario Power Corporation's Pickering-7 plant ran for 894 days, (Photo by Pallava Bagla/Corbis via Getty Images)
भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को नए सिरे से आकार देने की दिशा में एक बड़ा विधायी कदम उठाया है। सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल, 2025 के जरिए देश के परमाणु कानूनों को समेकित और आधुनिक किया गया है। यह कानून कड़े नियामकीय नियंत्रण के तहत सीमित निजी भागीदारी की अनुमति देता है और परमाणु सुरक्षा ढांचे को मजबूत करते हुए एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा प्रदान करता है। यह बिल भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसमें 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य शामिल है।
परमाणु ऊर्जा को एक भरोसेमंद और कम-कार्बन ऊर्जा स्रोत
परमाणु ऊर्जा नियंत्रित परमाणु अभिक्रियाओं, विशेषकर न्यूक्लियर फिशन, के माध्यम से उत्पन्न होती है, जिसमें परमाणुओं के विखंडन से भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है। इस ऊष्मा का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाता है, जिसमें ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा को एक भरोसेमंद और कम-कार्बन ऊर्जा स्रोत माना जाता है, जो सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का पूरक बनती है और 24×7 स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करती है। भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लक्ष्यों और डेटा सेंटर व एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टरों के लिए अहम स्तंभ माना जा रहा है।
परमाणु कार्यक्रम हमेशा सख्त कानूनी ढांचे के तहत संचालित
भारत का परमाणु कार्यक्रम हमेशा सख्त कानूनी ढांचे के तहत संचालित रहा है। परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 ने 1948 के पुराने कानून को प्रतिस्थापित किया और परमाणु ऊर्जा को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रखा। इसके बाद 1986, 1987 और 2015 में किए गए संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार के साथ-साथ सरकारी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों को भी सीमित रूप से परमाणु बिजली उत्पादन की अनुमति दी गई, जबकि संप्रभु नियंत्रण बरकरार रखा गया। न्यूक्लियर डैमेज के लिए सिविल दायित्व अधिनियम, 2010 के तहत ‘नो-फॉल्ट लाइबिलिटी’ व्यवस्था लागू की गई, ताकि किसी भी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके और सार्वजनिक भरोसा बना रहे।
SHANTI बिल लाने की जरूरत क्यों पड़ी
जैसे-जैसे भारत का परमाणु कार्यक्रम परिपक्व हो रहा है और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य बढ़ रहे हैं, मौजूदा कानूनी ढांचे को खंडित और समयानुकूल न मानने की जरूरत महसूस की जा रही थी। SHANTI बिल इसी आवश्यकता का जवाब है। यह पुराने कानूनों की जगह एक एकीकृत, भविष्य-उन्मुख कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो तकनीकी प्रगति, क्षमता विस्तार और नियामकीय स्पष्टता को ध्यान में रखता है।
भारत की मौजूदा परमाणु ऊर्जा स्थिति
वर्तमान में परमाणु ऊर्जा भारत के कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3% योगदान देती है। वर्ष 2024-25 में इसका हिस्सा 3.1% रहा। देश की स्थापित परमाणु क्षमता 8.78 गीगावॉट है। स्वदेशी 700 मेगावॉट रिएक्टरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित 1,000 मेगावॉट यूनिट्स के जरिए यह क्षमता 2031-32 तक 22.38 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।
न्यूक्लियर एनर्जी मिशन और एसएमआर पर जोर
केंद्रीय बजट 2025-26 में न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की घोषणा की गई, जिसके लिए 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) के डिजाइन, विकास और तैनाती को बढ़ावा देना है। लक्ष्य है कि 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी एसएमआर चालू किए जाएं। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर द्वारा BSMR-200, SMR-55 और हाइड्रोजन उत्पादन के लिए हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर पर काम किया जा रहा है।
बढ़ती बिजली मांग और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा का विस्तार अनिवार्य
भारत की बढ़ती बिजली मांग और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा का विस्तार अनिवार्य हो गया है। मौजूदा कानूनों में आवश्यक लचीलापन और गति की कमी महसूस की जा रही थी। SHANTI बिल इन चुनौतियों का समाधान करते हुए बिजली उत्पादन, गैर-बिजली अनुप्रयोगों और उन्नत तकनीकों को एकीकृत कानूनी आधार प्रदान करता है।
SHANTI बिल की प्रमुख विशेषताएं
यह बिल परमाणु संयंत्र संचालन, बिजली उत्पादन, उपकरण निर्माण और चयनित ईंधन-चक्र गतिविधियों में सीमित निजी भागीदारी की अनुमति देता है, लेकिन सभी गतिविधियां सख्त नियामकीय मंजूरी के अधीन होंगी। ईंधन संवर्धन, प्रयुक्त ईंधन प्रबंधन, भारी जल उत्पादन और उच्च-स्तरीय कचरा प्रबंधन जैसे संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह केंद्र सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। बिल में लाइसेंसिंग प्रणाली, ग्रेडेड दायित्व ढांचा और परमाणु क्षति के लिए संतुलित सिविल दायित्व व्यवस्था शामिल की गई है।
संस्थागत मजबूती और निगरानी
AERB को वैधानिक दर्जा देकर उसकी स्वतंत्रता और अधिकार बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही सुरक्षा, संरक्षा, सेफगार्ड्स और आपातकालीन तैयारियों को मजबूत किया गया है। विवाद समाधान के लिए एटॉमिक एनर्जी रेड्रेसल एडवाइजरी काउंसिल बनाई गई है, जबकि अपील प्राधिकरण के रूप में विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण को नामित किया गया है।
रणनीतिक नियंत्रण और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा
निजी भागीदारी के बावजूद सरकार के पास ईंधन-चक्र, कचरा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े सभी रणनीतिक क्षेत्रों पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा, जिससे राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहेंगे। SHANTI बिल, 2025 भारत के परमाणु ऊर्जा इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है। यह कानून आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र की नींव रखता है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को मजबूती देता है।
