केंद्रीय बजट 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्किलिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी और रिसर्च को दिए गए मजबूत समर्थन से भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों और भविष्य के उद्यमियों को बड़ा लाभ मिलेगा। उद्योग जगत के नेताओं ने कहा है कि यह बजट भारत को केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता विकसित करने वाला राष्ट्र बनाने की दिशा में अहम कदम है।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, बजट में India AI Mission, National Quantum Mission, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान कोष और रिसर्च एवं इनोवेशन फंड जैसे प्रावधान भारत की शिक्षा और नवाचार व्यवस्था को नई मजबूती देंगे।
AIONOS के को-फाउंडर और वाइस चेयरमैन सीपी गुरनानी ने कहा कि बजट में AI, सेमीकंडक्टर, क्लाउड और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में नेतृत्व मजबूत बुनियाद से ही संभव है। India AI Mission को मजबूत करने से AI रिसर्च, उसके उपयोग और नैतिक संचालन को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी एजेंडा नहीं है, बल्कि AI को स्किलिंग, रोजगार तैयारी और MSME सशक्तिकरण से जोड़कर बजट ने यह स्पष्ट किया है कि विकास, समावेशन और प्रतिस्पर्धा एक साथ आगे बढ़नी चाहिए।
सोना कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के वाइस चेयरमैन चॉको वलियप्पा ने कहा कि बजट में तकनीक को कृषि, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे खेतों में काम करने वाले किसानों, STEM क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि शिक्षा क्षेत्र के लिए 1,39,289 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14.2 प्रतिशत अधिक है। बजट में औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव भी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा देगा।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य ऐसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप के लिए सबसे उपयुक्त हैं, जहां मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस और शैक्षणिक संस्थान पहले से मौजूद हैं।
एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलुग ने कहा कि बजट में प्रस्तावित ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ फ्रेमवर्क शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने में मदद करेगा, खासकर AI, डेटा इंजीनियरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे उभरते क्षेत्रों में।
उन्होंने यह भी कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों को डिजिटल इकॉनमी जोन के रूप में विकसित करने से नए टैलेंट पूल सामने आएंगे और भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर इकोसिस्टम और मजबूत होगा।
कुल मिलाकर, उद्योग जगत का मानना है कि यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि भारत की अगली विकास यात्रा AI आधारित तकनीक, बड़े पैमाने पर स्किल ट्रांसफॉर्मेशन और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी सेवाओं के जरिए तय होगी।
