10 अप्रैल । केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को भूटान की अपनी आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन पुनात्सांगचू-I और पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना स्थलों का दौरा किया।
पुनात्सांगछू-I परियोजना स्थल पर, मंत्री ने बांध के निर्माण हेतु कंक्रीट डालने के समारोह में भाग लिया, जो परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह परियोजना भारत और भूटान के बीच सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत परियोजना है और इसके पूरा होने पर भूटान की जलविद्युत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
इस यात्रा के दौरान, लाल ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत-भूटान की दीर्घकालिक साझेदारी पर प्रकाश डाला और वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। उन्होंने परियोजना को सुरक्षित और कुशलतापूर्वक आगे बढ़ाने में दोनों देशों के इंजीनियरों और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों की भी सराहना की। मंत्री ने विद्युत संयंत्र का निरीक्षण किया और अब तक की प्रगति और कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा की।
बाद में उन्होंने पुनातसांगचू-II जलविद्युत परियोजना का दौरा किया, जिसका संयुक्त उद्घाटन 11 नवंबर, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने किया था।
परियोजना के परिचालन प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि इससे पहले ही पर्याप्त बिजली और राजस्व उत्पन्न हो चुका है, साथ ही भारत को स्वच्छ ऊर्जा का निर्यात भी संभव हो पा रहा है। उन्होंने परियोजना के सफल क्रियान्वयन और परिचालन दक्षता की प्रशंसा की और भूटान के आर्थिक विकास में इसके योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने भूटान के सतत ऊर्जा विकास में भारत के समर्थन की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
इस दौरे में विद्युत संयंत्र और बांध स्थल का निरीक्षण शामिल था, जहां अधिकारियों ने मंत्री को चल रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी।
इस यात्रा के दौरान मंत्री ने वांगडू फोड्रंग जोंग का भी दौरा किया, जो एक ऐतिहासिक मठ-किला है और भूटान की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।
लाल 9 से 12 अप्रैल तक भूटान की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।
