रायपुर, 08 मई । छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ताड़मेटला नक्सली हमले के मामले में सभी आरोपिताें को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इस मामले में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रकरण प्रस्तुत हुआ था लोअर कोर्ट में कन्विक्शन नहीं हो पाया था। विभिन्न कारणों से पुलिस, प्रशासन की ओर से हाई कोर्ट में अपील की गई थी उसमें भी कन्विक्शन नहीं हो पाया था। अभी न्यायालय का दरवाजा बाकी है।
उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के उप कमांडर सत्यवान सिंह, कंपनी और पुलिस बल के साथ 82वीं फोर्स के साथ 04 अप्रैल 2010 से 07 अप्रैल 2010 तक एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग पर थे, जब 06 अप्रैल 2010 की सुबह ताडमेटला गांव के जंगल में नक्सलियों से मुठभेड़ हुई। पुलिस बल को देखते ही नक्सलियों ने उन्हें जान से मारने की मंशा से भारी गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में गोलीबारी की। उक्त गोलीबारी में 76 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना की रिपोर्ट चिन्तागुफा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है।
राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा कि निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने का फैसला अवैध और अस्थिर है। निचली अदालत महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समझने में विफल रही है, जिसमें आरोपित बरसे लखमा का मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिया गया इकबालिया बयान भी शामिल है, जिसमें उसने अन्य आरोपिताें के साथ इस अपराध में शामिल होने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, निचली अदालत बम निरोधक दस्ते द्वारा जब्त किए गए पाइप बमों और विस्फोटकों तथा अन्य सहायक सामग्री को भी समझने में विफल रही है। धारा 311 सीआरपीसी के तहत सात घायल सीआरपीएफ जवान, जो चश्मदीद गवाह थे, की जांच के लिए अभियोजन पक्ष के आवेदन को खारिज करना एक गंभीर त्रुटि है, जो मामले को कमजोर करती है।
अभियुक्तों को हत्या के कृत्यों के वास्तविक क्रियान्वयन से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या प्रत्यक्षदर्शी गवाही नहीं है। किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने अभियुक्तों की पहचान अपराधियों के रूप में नहीं की है। धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता किसी स्वतंत्र साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं है। अभियुक्त का कथित इकबालिया बयान, जिसके अंतर्गत जब्त की गई विस्फोटक सामग्री, जिसमें पाइप बम, ग्रेनेड और राइफलें शामिल हैं, घटना स्थल से बरामद की गई थी, न कि आरोपित के कब्जे से। महत्वपूर्ण बात यह है कि सामग्री को विस्फोटक प्रमाणित करने वाली एफएसएल रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे जब्ती का सबूत अप्रभावी हो जाता है। जांच त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती है क्योंकि शस्त्र अधिनियम के तहत आवश्यक अभियोजन स्वीकृति का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मामले काे न्यायालय में अपील किया जाएगा।
