भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक अनिश्चितताओं का बखूबी सामना किया है और विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी हुई है। जुलाई बुलेटिन में प्रकाशित अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक लेख में, आरबीआई ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग और लचीले औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों ने अस्थिर भू-राजनीति और आपूर्ति श्रृंखला के दबावों से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद आर्थिक गति को बनाए रखने में मदद की है।
बुलेटिन में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बाहरी व्यापार में तेजी जारी रही, निर्यात और आयात दोनों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के हालिया कार्यान्वयन और अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में हुई प्रगति से व्यापार की संभावनाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। लेख में उल्लेख किया गया है कि भारत के बाहरी भेद्यता संकेतक मजबूत बने हुए हैं और हाल के महीनों में विदेशी निवेश में सुधार हुआ है, जो अर्थव्यवस्था में नए सिरे से विश्वास को दर्शाता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जुलाई में 20 तारीख तक इक्विटी और ऋण बाजारों में 3.1 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया, जबकि इस वर्ष अप्रैल और मई के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अधिक रहा।
लेख में कहा गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में मई के 3.9 प्रतिशत से बढ़कर जून में 18 महीनों का उच्चतम स्तर 4.4 प्रतिशत हो गया, जिसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि थी। चावल, गेहूं, खाद्य तेल और आलू, प्याज और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के साथ खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव बना रहा, जबकि मूल मुद्रास्फीति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
