नई दिल्ली, 17 अगस्त । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को अमर क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
बिरला ने एक्स पर लिखा, “भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले मदन लाल ढींगरा का जीवन अदम्य साहस, अटूट राष्ट्रभक्ति और त्याग की प्रेरक गाथा है। एक समृद्ध परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने सुख-सुविधाओं का जीवन छोड़कर देश की स्वतंत्रता को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाया।”
उन्होंने कहा कि मदन लाल ढींगरा का बलिदान उस दौर के युवाओं में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रखर करने वाला था। उनका साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प आज भी युवाओं को देशप्रेम की प्रेरणा देता है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 17 अगस्त का दिन विशेष महत्व रखता है। यह वही दिन है जब महान क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उनकी शहादत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन गौरवशाली अध्यायों में शामिल है, जो आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए त्याग और साहस की प्रेरणा देते हैं।
मदन लाल ढींगरा का जन्म 18 सितंबर 1883 को अमृतसर में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड गए, जहां उनका संपर्क भारतीय राष्ट्रवादी विचारों से हुआ। उस समय विदेश में रहकर भी कई भारतीय युवा ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ा रहे थे। ढींगरा भी इसी विचारधारा से प्रभावित हुए और भारत की गुलामी के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना।
01 जुलाई 1909 को लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान ढींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हटन कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने ब्रिटेन समेत पूरी दुनिया का ध्यान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ओर खींचा। उन्हें गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया और अदालत ने मौत की सजा सुनाई। 17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटनविल जेल में मदन लाल ढींगरा को फांसी दे दी गई। उन्होंने बिना झुके अपने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
