नई दिल्ली, 26 अगस्त । डीआरडीओ ने लद्दाख में दुनिया के सबसे ज्यादा ऊंचाई वाले ड्रॉप जोन में से एक पर अपने मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम का सफल टेस्ट किया। ये ट्रायल दक्षिण-पूर्वी लद्दाख के न्योमा-मुध ड्रॉप जोन में किए गए, जहां तापमान माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक था। तीन टेस्ट जम्पर्स ने 22 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई और 13,700 फीट की ऊंचाई पर सुरक्षित रूप से उतरे। इस स्वदेशी प्रणाली से भारतीय सशस्त्र बलों को 25 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर तैनात करने की क्षमता मिलेगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (एमसीपीएस) अत्याधुनिक पैराशूट प्रणाली है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशालाओं आगरा स्थित एयर डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) और बेंगलुरु स्थित बीईएमएल ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के उपयोग में आने वाली एकमात्र ऐसी पैराशूट प्रणाली है, जो 25 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई से संचालन करने में सक्षम है। इसे 32 हजार फीट तक की ऊंचाई से सफलतापूर्वक परखा जा चुका है।
अब देश ने दक्षिण-पूर्वी लद्दाख में मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम का परीक्षण करके अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस परीक्षण को एडीआरडीई के टेस्ट जंपर्स विंग कमांडर राहुल झा, चीफ टेस्ट जंपर आरजे सिंह और एमडब्ल्यूओ विवेक तिवारी ने अंजाम दिया। सभी जंपर्स ने एमसीपीएस के साथ इसके विभिन्न उप-तंत्रों का भी इस्तेमाल किया। चुनौतीपूर्ण न्योमा-मुध ड्रॉप जोन में माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तापमान और 22 हजार फीट की ऊंचाई से इसका सफल परीक्षण किया गया। इसके बाद टेस्ट जंपर्स ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पैराशूट को नियंत्रित करते हुए नीचे की ओर यात्रा की और करीब 13,700 फीट की ऊंचाई पर सुरक्षित लैंडिंग की।
डीआरडीओ के मुताबिक इतनी अधिक ऊंचाई और बेहद कम तापमान के बावजूद मिलिट्री कॉम्बेट पैराशूट और उससे जुड़े स्वदेशी सिस्टम ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया। यह प्रणाली भारत के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम से लैस है, जो बाहरी हस्तक्षेप या जामिंग से सुरक्षित और सटीक नेविगेशन सुनिश्चित करती है। इसमें उतरने की धीमी दर, बेहतरीन स्टीयरिंग नियंत्रण और विशेष ऑक्सीजन सिस्टम व पैरा-कंप्यूटर जैसी स्वदेशी उप-प्रणालियां हैं। परीक्षण के दौरान स्वदेशी पैरा कंप्यूटर, ऑक्सीजन सिस्टम और विशेष जंपसूट सहित सभी संबंधित प्रणालियों का उपयोग किया गया। इससे अत्यधिक ऊंचाई पर पूरे सिस्टम की संयुक्त कार्यक्षमता और विश्वसनीयता का भी आकलन किया गया।
