नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने आज प्रतिनिधि सभा को अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस संकट से उबरने के लिए दृढ़ संकल्प और साहस की आवश्यकता है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन से आई अचानक बाढ़ ने पिछले महीने की 26 तारीख को उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। 1,100 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि 4,800 से अधिक लोग लापता हैं।
श्री शाह ने कहा कि इस आपदा ने न केवल रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग के तीन प्रभावित जिलों को तबाह किया है, बल्कि पूरे देश को भी गहरा आघात पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में देश के नेतृत्व को आँसू बहाने के बजाय साहस, समर्थन और आश्वासन प्रदान करना चाहिए।
बचाव एवं राहत कार्यों के संबंध में प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों को तैनात कर दिया गया है, वहीं स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सेना के हेलीकॉप्टर बचाव एवं निकासी अभियान चला रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर निजी हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं।
श्री शाह ने कहा कि सरकार ने पीड़ितों के परिवारों के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत कर दी है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों को तीन महीने के लिए संकटग्रस्त घोषित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि घायलों को मुफ्त चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं बाढ़ से विस्थापित लोगों के लिए भोजन और आश्रय की व्यवस्था की जा रही है।
प्रधानमंत्री ने सदन को यह भी सूचित किया कि प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी की आपूर्ति और परिवहन संपर्क बहाल करने के लिए स्थानीय और प्रांतीय अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं।
इस बीच, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान जारी रहने के कारण भारत नेपाल को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। नेपाल में भारत के राजदूत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि राहत और बचाव सामग्री लेकर पांचवां भारतीय विमान आज दोपहर हिमालयी देश में पहुंचा। विमान में सुरंग बचाव के विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन आवश्यक दवाएं हैं।
